भारत की बढ़ती ताकत से बदले चीन के तेवर
प्रकाशित: 28-08-2026 | लेखक: संपादकीय टीम
भारत और चीन के रिश्ते लंबे समय से उतार-चढ़ाव से गुजरते रहे हैं। दोनों देशों के बीच हजारों किमी लंबी सीमा, ऐतिहासिक विवाद, रणनीतिक प्रतिस्पर्धा और एशिया में प्रभाव बढ़ाने की होड़ ने संबंधों को कई बार तनावपूर्ण बनाया है। ऐसे समय में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल की बीजिंग यात्रा और चीन के उपराष्ट्रपति हान झेंग से उनकी मुलाकात को केवल एक सामान्य कूटनीतिक बैठक के रूप में नहीं देखा जा सकता। इस मुलाकात में सीमा पर शांति और स्थिरता बनाए रखने के साथ-साथ आर्थिक, राजनीतिक और बहुपक्षीय क्षेत्रों में द्विपक्षीय संबंधों को आगे बढ़ाने पर चर्चा हुई है। यह संकेत जरूर देता है कि दोनों देश टकराव की जगह संवाद और व्यावहारिक सहयोग की दिशा में आगे बढ़ना चाहते हैं।
डोभाल चीन के विदेश मंत्री और भारत-चीन सीमा विवाद के विशेष प्रतिनिधि वांग यी के साथ विशेष प्रतिनिधि स्तर की 25वीं वार्ता में शामिल होने के लिए बीजिंग पहुंचे हैं। वर्ष 2003 में स्थापित विशेष प्रतिनिधि तंत्र का उद्देश्य भारत और चीन के बीच सीमा विवाद का व्यापक समाधान तलाशना है। लगभग 3,488 किमी लंबी वास्तविक नियंत्रण रेखा से जुड़े जटिल सवालों का समाधान आसान नहीं है, लेकिन बातचीत का यह तंत्र दोनों देशों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। इसका सबसे बड़ा महत्व यह है कि सीमा पर तनाव की स्थिति बनने पर भी दोनों देशों के बीच संवाद का रास्ता खुला रहता है।
चीन के उपराष्ट्रपति हान झेंग के साथ डोभाल की मुलाकात में भी सीमा क्षेत्रों में शांति और स्थिरता को मजबूत करने पर जोर दिया गया। चीनी पक्ष की ओर से यह संदेश दिया गया कि भारत और चीन को अपने संबंधों को रणनीतिक और दीर्घकालिक दृष्टिकोण से देखना चाहिए। चीन ने दोनों देशों के शीर्ष नेताओं के बीच बनी सहमतियों को लागू करने के लिए मिलकर काम करने की आवश्यकता पर भी बल दिया।
-कांतिलाल मांडोत,
सूरत, गुजरात।
डोभाल चीन के विदेश मंत्री और भारत-चीन सीमा विवाद के विशेष प्रतिनिधि वांग यी के साथ विशेष प्रतिनिधि स्तर की 25वीं वार्ता में शामिल होने के लिए बीजिंग पहुंचे हैं। वर्ष 2003 में स्थापित विशेष प्रतिनिधि तंत्र का उद्देश्य भारत और चीन के बीच सीमा विवाद का व्यापक समाधान तलाशना है। लगभग 3,488 किमी लंबी वास्तविक नियंत्रण रेखा से जुड़े जटिल सवालों का समाधान आसान नहीं है, लेकिन बातचीत का यह तंत्र दोनों देशों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। इसका सबसे बड़ा महत्व यह है कि सीमा पर तनाव की स्थिति बनने पर भी दोनों देशों के बीच संवाद का रास्ता खुला रहता है।
चीन के उपराष्ट्रपति हान झेंग के साथ डोभाल की मुलाकात में भी सीमा क्षेत्रों में शांति और स्थिरता को मजबूत करने पर जोर दिया गया। चीनी पक्ष की ओर से यह संदेश दिया गया कि भारत और चीन को अपने संबंधों को रणनीतिक और दीर्घकालिक दृष्टिकोण से देखना चाहिए। चीन ने दोनों देशों के शीर्ष नेताओं के बीच बनी सहमतियों को लागू करने के लिए मिलकर काम करने की आवश्यकता पर भी बल दिया।
-कांतिलाल मांडोत,
सूरत, गुजरात।