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अलग-अलग विचार जाहिर करना सच्चे लोकतंत्र का प्रतीक : भाजपा

प्रकाशित: 24-09-2026 | लेखक: वीर अर्जुन टीम
अलग-अलग विचार जाहिर करना सच्चे लोकतंत्र का प्रतीक : भाजपा
वीर अर्जुन संवाददाता
नई दिल्ली। भाजपा ने बुधवार को कहा कि आधिकारिक विचार-विमर्श के दौरान तीनों निर्वाचन आयुक्तों के अलग-अलग विचार जाहिर करने से जुड़ी खबरें निर्वाचन आयोग के लोकतांत्रिक तरीके से काम करने को प्रदर्शित करती हैं।
सत्तारूढ़ पार्टी ने कहा कि ये खबरें विपक्षी दलों के इन आरोपों को भी गलत साबित करती हैं कि निर्वाचन आयोग तानाशाह तरीके से काम कर रहा है। भाजपा की यह प्रतिािढया उस मीडिया रिपोर्ट पर छिड़े विवाद के बीच आई है, जिसमें कहा गया है कि निर्वाचन आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने देशभर में मकदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रािढया के दौरान विभिन्न राज्यों में (मतदाताओं के) नामों को हटाए जाने समेत कई मुद्दों पर चिंता जताई थी। भाजपा प्रवक्ता संबित पात्रा ने यहां पार्टी मुख्यालय में संवाददाता सम्मेलन में कहा, आधिकारिक विचार-विमर्श के दौरान निर्वाचन आयुक्तों के अलग-अलग विचार जाहिर करने से जुड़ी खबरें सच्चे लोकतंत्र को दर्शाती हैं। उन्होंने आरोप लगाया, अगर चुनाव कराने वाले निर्वाचन आयुक्तों के बीच कोई संवाद और विचारों का आदान-प्रदान नहीं होता, तो विपक्षी दल 'तानाशाही' का आरोप लगाएंगे और उन्हें सरकार की 'हां में हां मिलाने वाला' बताएंगे। पात्रा ने कहा कि इस मामले में निर्वाचन आयोग की ओर से जारी बयान दर्शाता है कि न तो आयोग और न ही भारत की कोई अन्य संवैधानिक संस्था तानाशाही शासन के अधीन है। उन्होंने कहा, इससे पता चलता है कि निर्वाचन आयोग और अन्य सभी संवैधानिक संस्थाएं लोकतांत्रिक तरीके से काम कर रही हैं और देश के लोकतंत्र को बनाए रख रही हैं। पात्रा ने विपक्षी दलों पर निर्वाचन आयोग और सरकार पर बेबुनियाद आरोप लगाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, निर्वाचन आयोग और सरकार को तानाशाह बताने वाले विपक्षी दल आज अपने ही जाल में फंस गए हैं।