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ज्ञानेश कुमार ने तानाशाही चलाई, उन्हें हटाया जाए: विपक्ष

प्रकाशित: 24-09-2026 | लेखक: वीर अर्जुन टीम
ज्ञानेश कुमार ने तानाशाही चलाई, उन्हें हटाया जाए: विपक्ष
वीर अर्जुन संवाददाता
नई दिल्ली। निर्वाचन आयोग के कई फैसलों पर दो आयुक्तों द्वारा लिखित आपत्ति दर्ज कराए जाने की खबर सामने आने के बाद बुधवार को सियासी बवंडर खड़ा हो गया और विपक्षी दलों ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार पर आयोग के कामकाज को हाईजैक करने तथा तानाशाही चलाने का आरोप लगाया और उन्हें पद से हटाए जाने की मांग की।
कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा, वोट चोरी भारतीय लोगों के खिलाफ अपराध और हमारे संविधान पर सीधा हमला है। भाजपा, आरएसएस और निर्वाचन आयोग, जिन्होंने इसे किया है, उन्होंने देशद्रोह का कृत्य किया है। न्याय किया जाएगा। उन्होंने एक वीडियो भी पोस्ट किया, जिसमें कहा गया है कि वोट चोरी में शामिल निर्वाचन आयोग के अधिकारियों को बख्शा नहीं जाएगा। कांग्रेस के प्रवक्ता और वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक सिंघवी ने आरोप लगाया कि कुमार ने न केवल संवैधानिक मूल्यों पर हमला किया है, बल्कि अपने सहयोगी निर्वाचन आयुक्तों को भी निर्णय प्रािढया से अलग रखा है।
समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कहा कि उच्चतम न्यायालय को इस पूरे मामले पर संज्ञान लेना चाहिए।
यादव ने एक्स पर पोस्ट किया, यह एक बेहद गंभीर समाचार है कि पिछले 10 महीनों में दो चुनाव आयुक्तों ने निर्वाचन आयोग के गलत निर्णयों पर 14 बार अपनी आपत्ति दर्ज कराई है। इसका सीधा मतलब है कि सभी चुनाव आयुक्त अपना सही काम नहीं कर पा रहे हैं। मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के पोलित ब्यूरो ने कहा कि अखबार में प्रकाशित खबर से निर्वाचन आयोग की निर्णय प्रािढया और उसकी संस्थागत विश्वसनीयता से जुड़े गंभीर सवाल उठते हैं।
पार्टी ने कहा कि कानून के तहत तीनों निर्वाचन आयुक्त समान स्थिति में हैं और मतभेद होने पर निर्णय बहुमत या सर्वसम्मति से होना चाहिए।
माकपा सांसद जॉन ब्रिटास ने एक्स पर पोस्ट कर कहा कि संसद को ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की प्रािढया तत्काल शुरू करनी चाहिए।
ब्रिटास ने इस बात का उल्लेख किया कि विपक्षी सांसदों ने 24 अप्रैल, 2026 को इस संबंध में नोटिस दिया था।
दरअसल, इस साल 24 अप्रैल को विपक्षी दलों के 73 राज्यसभा सदस्यों ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त को हटाने के लिए नया नोटिस सौंपा था। नोटिस में ज्ञानेश कुमार के खिलाफ नौ आरोप लगाए गए थे और संविधान के अनुच्छेद 324(5) सहित संबंधित प्रावधानों का हवाला दिया गया था।
ब्रिटास ने विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रािढया को लेकर भी उच्चतम न्यायालय से तत्काल हस्तक्षेप करने की मांग की।
आम आदमी पार्टी के नेता सौरभ भारद्वाज ने विपक्षी दलों से इस मुद्दे पर एकजुट रहने की अपील की।
उन्होंने एक्स पर कहा कि सभी विपक्षी दलों को पहले निर्वाचन आयोग से जुड़े इस मुद्दे को उठाना चाहिए और आयोग को व्यवस्थित करने पर ध्यान देना चाहिए।
ममता तृणमूल कांग्रेस के नेता डेरेक ओब्रायन ने बुधवार को मुख्य निर्वाचन आयुक्त को हटाने की मांग वाले पांच महीने पुराने प्रस्ताव को दोबारा लाने का आह्वान किया।
ओब्रायन ने पीटीआई-भाषा से कहा, ...पांच महीने पहले, राज्यसभा के 60 से अधिक सांसदों ने सभापति को पत्र लिखकर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने का प्रस्ताव पेश किया था।
राज्यसभा सदस्य ने कहा, वह पांच महीने पहले की बात थी। आज इस बड़ी खबर के सामने आने के बाद अब समय आ गया है कि सीईसी पर महाभियोग चलाने और लोकतंत्र को बचाने के लिए राज्यसभा के उस नोटिस को आगे बढ़ाया जाए।
राज्यसभा सदस्य कपिल सिब्बल ने बुधवार को कहा कि ज्ञानेश कुमार को तत्काल निलंबित किया जाना चाहिए।
सिब्बल ने यह भी कहा कि सरकार में सीईसी की कार्रवाई के पीछे कौन है, इसकी जांच के लिए प्राथमिकी दर्ज की जाए।
इस बीच, आयोग की ओर से जारी बयान में कहा गया है, आयोग द्वारा जारी सभी आधिकारिक आदेश, फैसले और प्रशासनिक निर्देश पूरी तरह से कानूनी रूप से वैध हैं और मुख्य निर्वाचन आयुक्त तथा अन्य निर्वाचन आयुक्त (नियुक्ति, सेवा शर्तें और पदावधि) अधिनियम, 2023 के तहत स्थापित वैधानिक प्रािढयाओं का पालन करते हैं।
बयान के अनुसार, मसौदा तैयार करने के चरण के दौरान आयोग के सदस्यों द्वारा उठाए गए किसी भी प्रािढयागत सवाल या दिए गए सुझाव मतदाताओं के अधिकारों की रक्षा के उद्देश्य से अपनाई जाने वाली सामान्य प्रशासनिक प्रािढया का हिस्सा हैं। निर्वाचन आयुक्तों द्वारा दिए गए सुझाव चुनावी प्रािढयाओं में और सुधार के लिए थे।
आयोग ने कहा, किसी भी संस्थान में विचार-विमर्श के दौरान अलग-अलग राय और टिप्पणियां सामने आना सामान्य प्रािढया का हिस्सा है। अंतिम निर्णय लिए जाने से पहले वे निर्णय लेने की प्रािढया का ही हिस्सा होती हैं। केवल तीनों निर्वाचन आयुक्त ही नहीं, बल्कि आयोग का प्रत्येक अधिकारी भी चुनावी व्यवस्था में सुधार के लिए आयोग को अपने सुझाव देने के लिए पूरी तरह अधिकृत है।