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राष्ट्रपति मुर्मू ने छात्रों से राष्ट्र व समाज के हितों को सर्वोपरि रखने का आग्रह किया

प्रकाशित: 24-09-2026 | लेखक: वीर अर्जुन टीम
राष्ट्रपति मुर्मू ने छात्रों से राष्ट्र व समाज के हितों को सर्वोपरि रखने का आग्रह किया
वडोदरा, (भाषा)। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने बुधवार को छात्रों से अपने कार्यक्षेत्र में राष्ट्र एवं समाज के हितों को सर्वोपरि रखने का आग्रह करते हुये कहा कि इससे वे देश और समाज के साथ खुद भी प्रगति करेंगे।
वडोदरा स्थित महाराजा सयाजीराव विश्वविद्यालय बड़ौदा के 75वें दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए मुर्मू ने उच्च शिक्षा में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी को रेखांकित करते हुये कहा कि हर क्षेत्र में उनकी बढ़ती मौजूदगी भारत के समावेशी विकास का सकारात्मक संकेत है। उन्होंने कहा कि छात्रों को अपनी शिक्षा का इस्तेमाल केवल अपने और अपने परिवार के लिए करने से आगे बढ़कर यह विचार करना चाहिए कि वे व्यापक जनहित में किस तरह योगदान दे सकते हैं। मुर्मू ने कहा, यदि छात्र अपने कार्यक्षेत्र में राष्ट्र एवं समाज के हितों को सर्वोपरि रखेंगे तो देश और समाज के साथ-साथ वे भी प्रगति करेंगे। उन्होंने कहा कि इस तरह की प्रगति उन्हें अपार संतुष्टि देगी और उन्हें अपनी शिक्षा के महत्व को समझने में मदद करेगी। उन्होंने कहा, यदि आप इंजीनियर बन रहे हैं तो ऐसी तकनीक विकसित करें जो लोगों का जीवन बेहतर बनाए। यदि आप डॉक्टर बन रहे हैं तो चिकित्सा को केवल एक पेशा न समझें, इसे सेवा के रूप में देखें। उन्होंने कहा, सेवा में मानवता और शांति निहित है और इससे संतुष्टि मिलती है। जीवन जीने के लिए संसाधनों की आवश्यकता होती है, लेकिन धन ही सब कुछ नहीं है; वास्तविक संतुष्टि दूसरों की सेवा करने से मिलती है। राष्ट्रपति ने कहा कि वैज्ञानिकों को मानवता के हित में समस्याओं के समाधान पर काम करना चाहिए, जबकि कलाकारों और लेखकों को अपनी कला और रचनाओं के माध्यम से समाज की संवेदनशीलता को समृद्ध करना चाहिए। उन्होंने कहा कि उद्यमियों को केवल संपत्ति ही नहीं, बल्कि रोजगार और अवसर भी पैदा करने चाहिए। विश्वविद्यालय के बहुविषयक स्वरूप का उल्लेख करते हुए मुर्मू ने कहा कि यह कला और विज्ञान, प्रौद्योगिकी, चिकित्सा, कानून, सामाजिक कार्य, ललित कला, प्रदर्शन कला, प्रबंधन और पत्रकारिता समेत कई क्षेत्रों में शिक्षा प्रदान कर रहा है। उन्होंने कहा कि आज की प्रमुख चुनौतियों के समाधान किसी एक विषय तक सीमित नहीं हो सकते। उन्होंने कहा, जलवायु परिवर्तन केवल पर्यावरण अध्ययन का विषय नहीं है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता केवल कंप्यूटर विज्ञान का विषय नहीं है। स्वास्थ्य केवल चिकित्सा विज्ञान का विषय नहीं है। राष्ट्रपति ने कहा कि महत्वपूर्ण समस्याओं के समाधान के लिए बहुविषयक दृष्टिकोण की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि समाज को वैज्ञानिक की जिज्ञासा, कलाकार की संवेदनशीलता, इतिहासकार की दृष्टि, अर्थशास्त्राr की समझ और समाजशास्त्राr की चेतना की जरूरत है। मुर्मू ने कहा कि प्रौद्योगिकी तेजी से आगे बढ़ रही है और छात्रों को इसे अपनाते समय अपनी अंतरात्मा को जागृत रखना चाहिए।
उन्होंने कहा, कृत्रिम बुद्धिमत्ता समाधान उपलब्ध करा सकती है, लेकिन सही सवाल पूछना आपका दायित्व है। प्रौद्योगिकी आपको गति दे सकती है, लेकिन आपको यह तय करना होगा कि आप किस दिशा में जाना चाहते हैं। राष्ट्रपति ने छात्रों से अपने जीवन और कार्यस्थलों पर संविधान में निहित न्याय, स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व के आदर्शों का पालन करने का भी आग्रह किया।
उन्होंने कहा कि मानवीय और संवैधानिक मूल्यों के प्रति उनकी प्रतिबद्धता भारत के लोकतंत्र को मजबूत करेगी। उन्होंने दीक्षांत समारोह में डिग्री प्राप्त करने वाले छात्रों और वर्तमान में विश्वविद्यालय में अध्ययनरत छात्रों के बीच महिलाओं की अधिक संख्या को रेखांकित किया। उन्होंने कहा, यह बदलते भारत की तस्वीर है, जो देशभर के ज्यादातर उच्च शिक्षण संस्थानों में दिखाई दे रही है। मुर्मू ने कहा कि महिलाएं शिक्षा के क्षेत्र में आगे बढ़ रही हैं, लेकिन पारंपरिक कार्यबल में उनकी भागीदारी उसी स्तर पर नहीं है। उन्होंने कहा कि जो महिलाएं घर पर काम करती हैं और आने वाली पीढ़ी का निर्माण करती हैं, वे भी देश में योगदान दे रही हैं और सम्मान की हकदार हैं।
उन्होंने कहा, इसलिए मैं बेटियों को धन्यवाद देना चाहती हूं। भले ही वे हमेशा पारंपरिक कार्यबल में दिखाई नहीं देती हैं, लेकिन वे देश के लिए काम कर रही हैं, उसके भविष्य का निर्माण कर रही हैं और वे अत्यधिक सम्मान की हकदार हैं।
राष्ट्रपति ने कहा कि गुजरात एक ऐसे स्थान का प्रतिनिधित्व करता है जहां अतीत, वर्तमान और भविष्य साथ-साथ चलते हैं।
उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता आंदोलन, सामाजिक सुधार, सहकारिता, उद्यमिता और आधुनिक उद्योग एवं प्रौद्योगिकी में राज्य का योगदान दिखाई देता है।
उन्होंने छात्रों से जीवन में आगे बढ़ते हुए अपने माता-पिता, शिक्षकों, मित्रों और समाज को याद रखने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि सफलता का सबसे सुंदर रूप वह है, जब व्यक्ति अपनी जड़ों से अलग हुए बिना आगे बढ़ता है।
भारत को 2047 तक विकसित राष्ट्र बनाने के लक्ष्य का उल्लेख करते हुए मुर्मू ने कहा कि ऐसे भारत के निर्माण में युवाओं की महत्वपूर्ण भूमिका है, जहां गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और स्वास्थ्य सेवा सभी तक पहुंचे, विज्ञान और प्रौद्योगिकी का इस्तेमाल मानव कल्याण के लिए हो, अवसर समान हों और महिलाओं तथा युवाओं की क्षमता का पूरी तरह उपयोग किया जाए।
उन्होंने कहा, आज देश की 65 प्रतिशत आबादी युवा है। उन्होंने विश्वास जताया कि छात्र अपने योगदान से गुजरात का गौरव बढ़ाएंगे और भारत के भविष्य को उज्ज्वल बनाएंगे।