बीसीसीआई, प्रदेश ािढकेट संघ राष्ट्रीय खेल प्रशासन अधिनियम के तहत क्यो नहीं आ सकते, न्यायालय ने पूछा
प्रकाशित: 10-09-2026 | लेखक: वीर अर्जुन टीम
नई दिल्ली, (भाषा)। उच्चतम न्यायालय ने भारतीय ािढकेट नियंत्रण बोर्ड (बीसीसीआई) और प्रदेश ािढकेट संघों से पूछा है कि वे राष्ट्रीय खेल प्रशासन अधिनियम 2025 के दायरे में क्यो नहीं आ सकते। मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और वी मोहना ने मंगलवार को बीसीसीआई के मामले में कुछ ािढकेट ईकाइयों द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान यह बात कही ।
पीठ ने बीसीसीआई और प्रदेश संघों के वकीलों से यह भी कहा कि वे इस बारे में निर्देश लें कि उनके पदाधिकारियों की सेवा की शर्ते 2025 के उस अधिनियम के तहत क्यो नहीं आनी चाहिये जो अब लागू हो चुका है। न्यायालय 2014 में दायर बीसीसीआई से जुड़ी एक याचिका पर सुनवाई कर रहा है और समय समय पर इस मामले में कई आवेदन दाखिल हो चुके हैं। इससे पहले न्यायालय ने सुधार के उपाय सुझाने के लिए पूर्व सीजेआई जस्टिस आर एम लोढ़ा की अध्यक्षता में एक समिति का गठन किया था। समिति को दी गई जिम्मेदारियों में बीसीसीआई के लिए संविधान तैयार करना भी शामिल था। न्यायालय ने बीसीसीआई के ढांचे, संगठन और कामकाज में सुधार से जुड़ी समिति की अनुशंसाओं को स्वीकार कर लिया था। न्यायालय ने सितंबर 2022 में बीसीसीआई के संविधान में बदलाव की मंजूरी दी थी और कहा था कि कोई पदाधिकारी लगातार 12 साल तक पद पर रह सकता है।
पीठ ने बीसीसीआई और प्रदेश संघों के वकीलों से यह भी कहा कि वे इस बारे में निर्देश लें कि उनके पदाधिकारियों की सेवा की शर्ते 2025 के उस अधिनियम के तहत क्यो नहीं आनी चाहिये जो अब लागू हो चुका है। न्यायालय 2014 में दायर बीसीसीआई से जुड़ी एक याचिका पर सुनवाई कर रहा है और समय समय पर इस मामले में कई आवेदन दाखिल हो चुके हैं। इससे पहले न्यायालय ने सुधार के उपाय सुझाने के लिए पूर्व सीजेआई जस्टिस आर एम लोढ़ा की अध्यक्षता में एक समिति का गठन किया था। समिति को दी गई जिम्मेदारियों में बीसीसीआई के लिए संविधान तैयार करना भी शामिल था। न्यायालय ने बीसीसीआई के ढांचे, संगठन और कामकाज में सुधार से जुड़ी समिति की अनुशंसाओं को स्वीकार कर लिया था। न्यायालय ने सितंबर 2022 में बीसीसीआई के संविधान में बदलाव की मंजूरी दी थी और कहा था कि कोई पदाधिकारी लगातार 12 साल तक पद पर रह सकता है।