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पाकिस्तान का उकसावा: इस्लामी नाटो का नारा और भारत-इजराइल के खिलाफ एकता की बात

प्रकाशित: 10-08-2026 | लेखक: आदित्य नरेंद्र
पाकिस्तान का उकसावा: इस्लामी नाटो का नारा और भारत-इजराइल के खिलाफ एकता की बात
पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने एक बार फिर भारत के खिलाफ उकसावे भरे बयान दिए हैं। उन्होंने इस्लामी देशों से एकजुट होकर “इस्लामिक नाटो'' जैसी सैन्य गठबंधन बनाने की अपील की है। उनका दावा है कि भारत और इजराइल से पैदा होने वाली चुनौतियों का मुकाबला करने के लिए मुस्लिम देशों को मिलकर खड़ा होना चाहिए। आसिफ ने पाकिस्तानी मीडिया से बातचीत में कहा कि मुस्लिम देशों को आपसी मतभेद भुलाकर नाटो जैसी व्यापक रक्षा व्यवस्था बनानी चाहिए। उन्होंने भारत पर आरोप लगाया कि अफगानिस्तान से संचालित भारतीय तत्व पाकिस्तान में आतंकवाद को बढ़ावा दे रहे हैं। साथ ही इजराइल के साथ सामान्यीकरण को मुस्लिम देशों के लिए बेकार बताया और सामूहिक जवाब की जरूरत पर जोर दिया। यह बयान सऊदी अरब और तुर्की के साथ हुए रक्षा समझौतों के संदर्भ में आया है। पाकिस्तान पिछले कुछ समय से इन देशों के साथ सुरक्षा सहयोग बढ़ाने की कोशिश कर रहा है। आसिफ का मकसद साफ है-पाकिस्तान को मुस्लिम उम्मा का रक्षक बताकर अपनी कूटनीतिक और सैन्य कमजोरियों को छिपाना। खोखला दावा और भारत का मजबूत रुख । पाकिस्तान की यह कोशिश नई नहीं है। वह लंबे समय से कश्मीर मुद्दे को अंतर्राष्ट्रीय बनाने और मुस्लिम देशों का समर्थन जुटाने की कोशिश करता रहा है। लेकिन हकीकत यह है कि ज्यादातर इस्लामी देश भारत के साथ अच्छे आर्थिक और कूटनीतिक संबंध रखते हैं। सऊदी अरब, यूएई और कई अन्य देशों के साथ भारत के मजबूत व्यापारिक और ऊर्जा संबंध हैं। भारत ने हमेशा पाकिस्तान की आतंकवाद समर्थक नीति का विरोध किया है। सीमा पार आतंकवाद और पाकिस्तान की दोहरी नीति विश्व स्तर पर जानी-पहचानी है। पाकिस्तान खुद आर्थिक संकट, राजनीतिक अस्थिरता और आंतरिक आतंकवाद से जूझ रहा है। ऐसे में इस्लामी देशों को एकजुट करने का नारा सिर्फ प्रचार है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस्लामी देशों के बीच गहरे मतभेद हैं-शिया-सुन्नी विभाजन, क्षेत्रीय प्रतिद्वंद्विता और अमेरिका जैसे देशों के साथ अलग-अलग रिश्ते। नाटो जैसी प्रभावी सैन्य व्यवस्था बनाना आसान नहीं। पाकिस्तान इसे भारत पर दबाव बनाने का औजार बनाना चाहता है, लेकिन यह रणनीति सफल होने की संभावना कम है।
यह घटनाक्रम भारत के लिए सतर्कता का संकेत है। पाकिस्तान-तुर्की के करीबी संबंध और सऊदी अरब के साथ रक्षा समझौते पर नजर रखनी होगी। लेकिन भारत की कूटनीति मजबूत है। वह पश्चिम एशिया के देशों के साथ संबंधों को और गहरा कर रहा है। आर्थिक साझेदारी, रक्षा सहयोग और ऊर्जा सुरक्षा के क्षेत्र में भारत की स्थिति मजबूत है। पाकिस्तान का “इस्लामिक नाटो'' वाला नारा उसकी कमजोरी का सबूत है। वह भारत के साथ सीधे टकराव में बार-बार हारता रहा है और अब धार्मिक एकता का मुखौटा लगाकर अपनी स्थिति सुधारने की कोशिश कर रहा है। भारत को इन उकसावों का जवाब कूटनीतिक परिपक्वता और मजबूत सुरक्षा तैयारियों से देना चाहिए।
पाकिस्तान की इस कोशिश को गंभीरता से तो लेना चाहिए, लेकिन डरने की जरूरत नहीं। भारत की रणनीतिक साझेदारियां और आंतरिक मजबूती किसी भी ऐसे गठबंधन के प्रभाव को सीमित रखने में सक्षम हैं। मुस्लिम देशों को भी समझना होगा कि पाकिस्तान का एजेंडा क्षेत्रीय शांति के बजाय अपने संकीर्ण हितों पर आधारित है।
-आदित्य नरेन्द्र