भारतीय संस्कृति के बारे में कुछ नहीं जानते ममदानी
प्रकाशित: 30-08-2026 | लेखक: आदित्य नरेंद्र
आदित्य नरेन्द्र
अमेरिका अपने आप को लोकतंत्र का पुरोधा मानता है और अभिव्यक्ति की वकालत करता है। लेकिन अब उसकी इस नीति पर सवाल उठने शुरू हो गए हैं। मामला दुनिया के सबसे बड़े गैर-सरकारी संगठन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से जुड़ा है। मेडिसन स्क्वायर गार्डन जैसे निजी स्थल पर कानूनी रूप से आयोजित कार्यक्रम को राजनीतिक असहमति के आधार पर रोकने या उसका खुला विरोध करने का अधिकार मेयर को भले न हो लेकिन सार्वजनिक बयानबाजी से एक संदेश जरूर जाता है। संघ प्रमुख मोहन भागवत भारत और अमेरिका सहित दुनिया भर में बसे लाखों हिंदुओं के बीच एक सम्मानित व्यक्ति हैं। भारतीय मूल के समुदाय में उनका कार्यक्रम सांस्कृतिक जुड़ाव, सेवा और संगठन की परंपरा से जुड़ा माना जाता है। ऐसे लोग जब दूसरे लोकतांत्रिक देशों में जाते हैं तो उनका स्वागत ही अपेक्षित होता है। विराध को व्यक्तिगत राय का अधिकार तो कहा जा सकता है लेकिन इसे शहर के सर्वोच्च पद से व्यक्त करना चुनिंदा नैतिकता का उदाहरण बन जाता है। न्यूयार्क के मेयर जोहरान ममदानी कुछ ऐसा ही कर रहे हैं। ममदानी अमेरिकी राजनेता और न्यूयार्क स्टेट असेम्बली के सदस्य हैं। वह वर्ष 2025 में न्यूयार्क के पहले मुस्लिम और सबसे कम उम्र के मेयर बने। उन्होंने 2021 में न्यूयार्क राज्य की 36वीं असेम्बली जिले का प्रतिनिधित्व किया है। उन्होंने 24 जून 2025 को हुए प्राइमरी चुनाव में पूर्व गवर्नर एंड्रयू कुओमी को हराया था। इसके बाद वह न्यूयार्क के मेयर बने। ममदानी का जन्म युगांडा में हुआ था। लेकिन उनका पालन-पोषण न्यूयार्क में हुआ। वह भारतीय फिल्म निर्देशक मीरा नायर और युगांडा के राजनीतिक विश्लेषक महमूद ममदानी के बेटे हैं। उल्लेखनीय है कि मीरा नायर ने सलाम बाम्बे और मानसून वेडिंग जैसी फिल्में बनाई हैं। स्पष्ट है कि ममदानी भारतीय-अमेरिकी पृष्टभूमि से आते हैं। ऐसे में उन्हें भारत-अमेरिका के संबंधों को मजबूत करने के fिलए काम करना चाहिए था। इसके उलट उन्होंने पाकिस्तान दिवस जैसे आयोजनों में भाग लिया और उसका समर्थन किया। ममदानी ने कहा कि वह किसी ऐसे कार्यक्रम का समर्थन नहीं करते जो बहिष्कारवादी सोच पर आधारित हो। शहर प्रशासन के पास ऐसे निजी कार्यक्रम रद्द करने के अधिकार पर स्थिति स्पष्ट नहीं है। इसका जवाब देते हुए संघ के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख सुनील आंबेकर ने कहा कि यूनिवर्सल बननेस सेलिब्रेशन एक अंतरधार्मिक और समावेशी आयोजन है। जहां सरसंघचालक विभिन्न समुदायों से संवाद करेंगे। इससे जाहिर है कि संघ को लेकर ममदानी जो कुछ भी आरोप लगा रहे हैं वह तथ्यहीन है। एक मेयर के रूप में उन्हें समान व्यवहार करना चाहिए। दरअसल जोहरान ममदानी की मां मीरा नायर भारतीय मूल की तो जरूर हैं लेकिन ममदानी भारतीय संस्कृति के बारे में कुछ नहीं जानते। उन्हें मालूम होना चाहिए कि संघ जिस भारतीय संस्कृति का प्रचार-प्रसार करता है उसका मूल आधार ही “वासुधैब कुटुम्बकम है। इसका अर्थ है कि पूरी दुनिया एक परिवार है। विश्व में भारत एक ऐसा देश है जहां अल्पसंख्यक सबसे बेहतर स्थिति में हैं। ममदानी अपने चुनावी वादों को पूरा करने में विफल रहे हैं। ऐसे में वह अप्रासांगिक होने से बचने के लिए मुस्लिम वोट बैंक की राजनीति कर रहे हैं। उनकी गतिविधियां और उनके बयान इस बात का स्पष्ट प्रमाण हैं। अच्छा होगा कि राजनीति में बने रहने और अपने वोट बैंक को संतुष्ट करने के लिए ममदानी भारत-अमेरिका के रिश्ते खराब न करें। इससे भारत ही नहीं बल्कि अमेरिका का भी नुकसान होगा।
अमेरिका अपने आप को लोकतंत्र का पुरोधा मानता है और अभिव्यक्ति की वकालत करता है। लेकिन अब उसकी इस नीति पर सवाल उठने शुरू हो गए हैं। मामला दुनिया के सबसे बड़े गैर-सरकारी संगठन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से जुड़ा है। मेडिसन स्क्वायर गार्डन जैसे निजी स्थल पर कानूनी रूप से आयोजित कार्यक्रम को राजनीतिक असहमति के आधार पर रोकने या उसका खुला विरोध करने का अधिकार मेयर को भले न हो लेकिन सार्वजनिक बयानबाजी से एक संदेश जरूर जाता है। संघ प्रमुख मोहन भागवत भारत और अमेरिका सहित दुनिया भर में बसे लाखों हिंदुओं के बीच एक सम्मानित व्यक्ति हैं। भारतीय मूल के समुदाय में उनका कार्यक्रम सांस्कृतिक जुड़ाव, सेवा और संगठन की परंपरा से जुड़ा माना जाता है। ऐसे लोग जब दूसरे लोकतांत्रिक देशों में जाते हैं तो उनका स्वागत ही अपेक्षित होता है। विराध को व्यक्तिगत राय का अधिकार तो कहा जा सकता है लेकिन इसे शहर के सर्वोच्च पद से व्यक्त करना चुनिंदा नैतिकता का उदाहरण बन जाता है। न्यूयार्क के मेयर जोहरान ममदानी कुछ ऐसा ही कर रहे हैं। ममदानी अमेरिकी राजनेता और न्यूयार्क स्टेट असेम्बली के सदस्य हैं। वह वर्ष 2025 में न्यूयार्क के पहले मुस्लिम और सबसे कम उम्र के मेयर बने। उन्होंने 2021 में न्यूयार्क राज्य की 36वीं असेम्बली जिले का प्रतिनिधित्व किया है। उन्होंने 24 जून 2025 को हुए प्राइमरी चुनाव में पूर्व गवर्नर एंड्रयू कुओमी को हराया था। इसके बाद वह न्यूयार्क के मेयर बने। ममदानी का जन्म युगांडा में हुआ था। लेकिन उनका पालन-पोषण न्यूयार्क में हुआ। वह भारतीय फिल्म निर्देशक मीरा नायर और युगांडा के राजनीतिक विश्लेषक महमूद ममदानी के बेटे हैं। उल्लेखनीय है कि मीरा नायर ने सलाम बाम्बे और मानसून वेडिंग जैसी फिल्में बनाई हैं। स्पष्ट है कि ममदानी भारतीय-अमेरिकी पृष्टभूमि से आते हैं। ऐसे में उन्हें भारत-अमेरिका के संबंधों को मजबूत करने के fिलए काम करना चाहिए था। इसके उलट उन्होंने पाकिस्तान दिवस जैसे आयोजनों में भाग लिया और उसका समर्थन किया। ममदानी ने कहा कि वह किसी ऐसे कार्यक्रम का समर्थन नहीं करते जो बहिष्कारवादी सोच पर आधारित हो। शहर प्रशासन के पास ऐसे निजी कार्यक्रम रद्द करने के अधिकार पर स्थिति स्पष्ट नहीं है। इसका जवाब देते हुए संघ के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख सुनील आंबेकर ने कहा कि यूनिवर्सल बननेस सेलिब्रेशन एक अंतरधार्मिक और समावेशी आयोजन है। जहां सरसंघचालक विभिन्न समुदायों से संवाद करेंगे। इससे जाहिर है कि संघ को लेकर ममदानी जो कुछ भी आरोप लगा रहे हैं वह तथ्यहीन है। एक मेयर के रूप में उन्हें समान व्यवहार करना चाहिए। दरअसल जोहरान ममदानी की मां मीरा नायर भारतीय मूल की तो जरूर हैं लेकिन ममदानी भारतीय संस्कृति के बारे में कुछ नहीं जानते। उन्हें मालूम होना चाहिए कि संघ जिस भारतीय संस्कृति का प्रचार-प्रसार करता है उसका मूल आधार ही “वासुधैब कुटुम्बकम है। इसका अर्थ है कि पूरी दुनिया एक परिवार है। विश्व में भारत एक ऐसा देश है जहां अल्पसंख्यक सबसे बेहतर स्थिति में हैं। ममदानी अपने चुनावी वादों को पूरा करने में विफल रहे हैं। ऐसे में वह अप्रासांगिक होने से बचने के लिए मुस्लिम वोट बैंक की राजनीति कर रहे हैं। उनकी गतिविधियां और उनके बयान इस बात का स्पष्ट प्रमाण हैं। अच्छा होगा कि राजनीति में बने रहने और अपने वोट बैंक को संतुष्ट करने के लिए ममदानी भारत-अमेरिका के रिश्ते खराब न करें। इससे भारत ही नहीं बल्कि अमेरिका का भी नुकसान होगा।