तिब्बत-नेपाल सीमा पर अचानक आई बाढ़ से हुई तबाही की पहली तस्वीरें सामने आईं
प्रकाशित: 07-09-2026 | लेखक: वीर अर्जुन टीम
जिरोंग (तिब्बत-नेपाल सीमा), (भाषा)। तिब्बत-नेपाल सीमा पर 26 अगस्त को अचानक आयी विनाशकारी बाढ़ ने पलक झपकते ही भारी तबाही मचा दी थी। इस तबाही का सबसे भयावह मंजर एक वीडियो में रिकॉर्ड है, जिसमें मिट्टी, चट्टानों और मलबे का विशाल सैलाब देखते ही देखते एक मजबूत आव्रजन चौकी को अपनी चपेट में ले लेता है। दुनियाभर में वायरल इस वीडियो में प्रकृति के रौद्र रूप और इमारतों तथा इंसानी जिंदगियों पर उसके विनाशकारी असर की भयावह झलक देखने को मिली।
अब तक इस तबाही का पूरा मंजर मुख्य रूप से नेपाल की तरफ से ही सामने आया था। नेपाल में इस आपदा से मरने वालों की संख्या 1,300 को पार कर चुकी है, जबकि करीब 5,000 लोग अब भी लापता हैं। यह आपदा 26 अगस्त को नेपाल-तिब्बत सीमा के पास बर्फ और चट्टानों के हिमस्खलन के कारण आई थी। इसके बाद भोटेकोशी नदी के रास्ते पानी और मलबे का भारी सैलाब नीचे की ओर बहा और उत्तरी तथा मध्य नेपाल के कई इलाकों में भारी तबाही मचा दी। रविवार को चीन ने पहली बार तिब्बत के तबाह हुए जिरोंग काउंटी को पीटीआई और कुछ चुनिंदा विदेशी मीडिया संस्थानों के लिए खोला।
इसी इलाके में वह सीमा आव्रजन चौकी स्थित थी, जो बाढ़ में पूरी तरह नष्ट हो गई। विदेशी मीडिया को यहां बाढ़ से हुई तबाही और बड़े पैमाने पर जारी राहत एवं पुनर्निर्माण कार्यों को देखने का मौका दिया गया। चीन शेष हिस्सों से कटे हुए सीमा चौकी क्षेत्र तक पहुंच बहाल करने के लिए सड़कों के पुनर्निर्माण का काम कर रहा है। उसने नेपाल को राहत सामग्री भी भेजी है। चीनी अधिकारियों के आंकड़ों के अनुसार, तिब्बत में 31 लोगों की मौत हुई है, जबकि 531 लोग अब भी लापता हैं। इनमें 261 विदेशी नागरिक भी शामिल हैं, जिनमें 49 भारतीय और 22 अन्य देशों के नागरिक हैं।
अब तक इस तबाही का पूरा मंजर मुख्य रूप से नेपाल की तरफ से ही सामने आया था। नेपाल में इस आपदा से मरने वालों की संख्या 1,300 को पार कर चुकी है, जबकि करीब 5,000 लोग अब भी लापता हैं। यह आपदा 26 अगस्त को नेपाल-तिब्बत सीमा के पास बर्फ और चट्टानों के हिमस्खलन के कारण आई थी। इसके बाद भोटेकोशी नदी के रास्ते पानी और मलबे का भारी सैलाब नीचे की ओर बहा और उत्तरी तथा मध्य नेपाल के कई इलाकों में भारी तबाही मचा दी। रविवार को चीन ने पहली बार तिब्बत के तबाह हुए जिरोंग काउंटी को पीटीआई और कुछ चुनिंदा विदेशी मीडिया संस्थानों के लिए खोला।
इसी इलाके में वह सीमा आव्रजन चौकी स्थित थी, जो बाढ़ में पूरी तरह नष्ट हो गई। विदेशी मीडिया को यहां बाढ़ से हुई तबाही और बड़े पैमाने पर जारी राहत एवं पुनर्निर्माण कार्यों को देखने का मौका दिया गया। चीन शेष हिस्सों से कटे हुए सीमा चौकी क्षेत्र तक पहुंच बहाल करने के लिए सड़कों के पुनर्निर्माण का काम कर रहा है। उसने नेपाल को राहत सामग्री भी भेजी है। चीनी अधिकारियों के आंकड़ों के अनुसार, तिब्बत में 31 लोगों की मौत हुई है, जबकि 531 लोग अब भी लापता हैं। इनमें 261 विदेशी नागरिक भी शामिल हैं, जिनमें 49 भारतीय और 22 अन्य देशों के नागरिक हैं।