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कैच द रेन कैंपेन में छत्तीसगढ़ देश में अव्वल, जल संचय जन भागीदारी में किया कमाल

प्रकाशित: 04-09-2026 | लेखक: वीर अर्जुन टीम
रायपुर, (छत्तीसगढ़ ब्यूरो)। जल संचय जन भागीदारी और कैच द रेन कैंपेन में छत्तीसगढ़ ने पूरे देश में बेहतरीन प्रदर्शन किया है। सूरजपुर, महासमुंद, बालोद, बलौदाबाजार-भाटापारा और कबीरधाम देश के शीर्ष 10 जिलों में शामिल हुआ है। राज्य में जल संरक्षण के लिए लगभग 78,000 स्ट्रक्पर तैयार किए गए. इस तरह बारिश की हर बूंद को सहेजने में छत्तीसगढ़ शीर्ष राज्य बना है।
नई दिल्ली के सुषमा स्वराज भवन में आयोजित जल शक्पि मंत्रालय के विभागीय शिखर सम्मेलन में सीएम शामिल हुए। उन्होंने पीएम के सामने छत्तीसगढ़ में जल संरक्षण के लिए किए जा रहे नवाचारों और जनभागीदारी आधारित प्रयासों की जानकारी राष्ट्रीय मंच पर साझा की। सम्मेलन के कैच द रेन सत्र में उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने राज्य में वर्षा जल संचयन, भू-जल पुनर्भरण तथा पेयजल स्रोतों के संरक्षण के लिए किए जा रहे कार्यों की विस्तार से जानकारी दी। सम्मेलन में केंद्रीय जल शक्पि मंत्री सीआर पाटिल मौजूद रहे।सीएम साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ ने जल संरक्षण को केवल शासकीय योजनाओं और जल संरचनाओं के निर्माण तक सीमित नहीं रखा है। किसानों, ग्राम पंचायतों, जल सखियों, जल मित्रों और स्थानीय समुदायों को इससे जोड़कर इसे व्यापक जनअभियान का स्वरूप दिया गया है। सीएम ने कहा कि वे स्वयं किसान परिवार से आते हैं और अपने गृहग्राम बगिया में हल चलाकर खेती कर चुके हैं, इसलिए खेती और ग्रामीण जीवन में पानी का महत्व उन्होंने बहुत करीब से देखा और समझा है। किसान के लिए पानी केवल एक प्राकृतिक संसाधन नहीं, बल्कि उसकी पसल, परिवार, आजीविका और भविष्य से जुड़ा विषय है। यही कारण है कि छत्तीसगढ़ में जल संरक्षण की योजनाओं के केंद्र में किसान और गांव को रखा गया है। उन्होंने सम्मेलन में कोरिया जिले से शुरू हुए 5 प्रतिशत मॉडल का विशेष उल्लेख किया. यह मॉडल जल संरक्षण में किसानों की स्वैच्छिक भागीदारी का अभिनव उदाहरण है।इस पहल के अंतर्गत किसान अपनी कृषि भूमि का लगभग 5 प्रतिशत हिस्सा भू-जल पुनर्भरण और वर्षा जल संचयन के लिए स्वेच्छा से उपलब्ध करा रहे हैं। इस हिस्से में ऐसी जल संरचनाएं विकसित की जा रही हैं, जिनमें बारिश का पानी खेत से बहकर बाहर जाने के बजाय वहीं एकत्र हो और धीरे-धीरे जमीन के भीतर समाहित हो सके।देश के कुल भौगोलिक क्षेत्रपल में लगभग चार प्रतिशत हिस्सेदारी रखने वाला छत्तीसगढ़ जल संचय जन भागीदारी अभियान में लगातार उत्कृष्ट प्रदर्शन कर रहा है। यह उपलब्धि केवल जल संरचनाओं की संख्या की नहीं, बल्कि जल संरक्षण के प्रति प्रदेश में विकसित हो रही सामूहिक चेतना और जनभागीदारी की भी उपलब्धि है।जल संचय जन भागीदारी अभियान के प्रथम चरण जेएसजेबी1.0 में छत्तीसगढ़ में 4 लाख 5 हजार 561 जल संरचनाएं बनाई गईं. इस चरण में छत्तीसगढ़ देश में दूसरे स्थान पर रहा. दूसरे चरण जेएसजेबी 2.0 में प्रदेश में 24 लाख 7 हजार 456 जल संरचनाएं दर्ज की गईं. इनमें से 23 लाख 7 हजार 768 जल संरचनाओं का कार्य पूरा हो चुका है. इस चरण में भी छत्तीसगढ़ ने देश में दूसरा स्थान हासिल किया. अब तीसरे चरण जेएसजेबी 3.0 में छत्तीसगढ़ ने देश में पहला स्थान प्राप्त किया है। इस चरण में प्रदेश में 79 हजार 775 जल संरचनाएं दर्ज की गई हैं, जिनमें से 77 हजार 719 जल संरचनाओं का कार्य पूर्ण हो चुका है।