सनातन परंपरा का अत्यंत पवित्र पर्व है श्रीकृष्ण जन्माष्टमी : स्वामी ज्ञानानंद
प्रकाशित: 04-09-2026 | लेखक: वीर अर्जुन टीम
कुरुक्षेत्र, (प्रकृति आश्री)। धर्मनगरी कुरुक्षेत्र में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के पावन पर्व को लेकर तैयारियां जोर-शोर से चल रही हैं। केडीबी रोड स्थित गीता ज्ञान संस्थानम में 4 सितंबर को भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव श्रद्धा, उल्लास और भक्तिभाव के साथ मनाया जाएगा। जन्माष्टमी महोत्सव की तैयारियों का गीता मनीषी स्वामी श्री ज्ञानानंद जी महाराज ने जायजा लिया और श्रीकृष्ण कृपा समिति के पदाधिकारियों की बैठक लेकर व्यवस्थाओं को सुदृढ़ करने के निर्देश दिए। उन्होंने सभी पदाधिकारियों एवं सेवकों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि श्रद्धालुओं की सुविधा और सेवा में किसी प्रकार की कमी नहीं रहनी चाहिए।
स्वामी श्री ज्ञानानंद जी महाराज ने कहा कि श्रीकृष्ण जन्माष्टमी सनातन परंपरा का अत्यंत पवित्र पर्व है। यह भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव के साथ-साथ उनके दिव्य जीवन, आदर्शों और श्रीमद्भगवद्गीता के संदेश को आत्मसात करने की प्रेरणा देता है। भगवान श्रीकृष्ण ने मानवता को प्रेम, सद्भाव, समता, धर्म और कर्तव्य के मार्ग पर चलने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में समाज में एकता, सहयोग और सद्भाव को सुदृढ़ करना आवश्यक है। इसी उद्देश्य से गीता ज्ञान संस्थानम में जन्माष्टमी को जीवन-मूल्यों से जोड़कर मनाया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि बच्चों को भारतीय संस्कृति और भगवान श्रीकृष्ण के आदर्शों से जोड़ने के लिए पिछले कई दिनों से विभिन्न ज्ञानवर्धक एवं सांस्कृतिक प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जा रहा है। इनमें गीता श्लोकोच्चारण, पेंटिंग, गायन, नृत्य, हांडी प्रतियोगिता तथा भगवान श्रीकृष्ण के जीवन एवं आदर्शों पर आधारित प्रतियोगिताएं शामिल हैं। इनके माध्यम से बच्चों में संस्कृति, सनातन परंपराओं और श्रीमद्भगवद्गीता के प्रति रुचि एवं संस्कार विकसित करने का प्रयास किया जा रहा है। 4 सितंबर को जन्माष्टमी के मुख्य दिन प्रात: से ही गीता ज्ञान संस्थानम में कार्पाम प्रारंभ हो जाएंगे। श्री श्री कृपा बिहारी जी का विशेष पूजन एवं आरती होगी और श्रद्धालुओं को उनके दिव्य दर्शन प्राप्त होंगे। संस्थानम परिसर को आकर्षक ढंग से सजाया जाएगा तथा भगवान श्रीकृष्ण के जीवन एवं लीलाओं पर आधारित झांकियां प्रस्तुत की जाएंगी। विशेष झूलों, बच्चों के लिए मनोरंजक आकर्षणों, सेवा-प्रसाद और विभिन्न स्टॉल की व्यवस्था रहेगी।
स्वामी श्री ज्ञानानंद जी महाराज ने कहा कि श्रीकृष्ण जन्माष्टमी सनातन परंपरा का अत्यंत पवित्र पर्व है। यह भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव के साथ-साथ उनके दिव्य जीवन, आदर्शों और श्रीमद्भगवद्गीता के संदेश को आत्मसात करने की प्रेरणा देता है। भगवान श्रीकृष्ण ने मानवता को प्रेम, सद्भाव, समता, धर्म और कर्तव्य के मार्ग पर चलने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में समाज में एकता, सहयोग और सद्भाव को सुदृढ़ करना आवश्यक है। इसी उद्देश्य से गीता ज्ञान संस्थानम में जन्माष्टमी को जीवन-मूल्यों से जोड़कर मनाया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि बच्चों को भारतीय संस्कृति और भगवान श्रीकृष्ण के आदर्शों से जोड़ने के लिए पिछले कई दिनों से विभिन्न ज्ञानवर्धक एवं सांस्कृतिक प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जा रहा है। इनमें गीता श्लोकोच्चारण, पेंटिंग, गायन, नृत्य, हांडी प्रतियोगिता तथा भगवान श्रीकृष्ण के जीवन एवं आदर्शों पर आधारित प्रतियोगिताएं शामिल हैं। इनके माध्यम से बच्चों में संस्कृति, सनातन परंपराओं और श्रीमद्भगवद्गीता के प्रति रुचि एवं संस्कार विकसित करने का प्रयास किया जा रहा है। 4 सितंबर को जन्माष्टमी के मुख्य दिन प्रात: से ही गीता ज्ञान संस्थानम में कार्पाम प्रारंभ हो जाएंगे। श्री श्री कृपा बिहारी जी का विशेष पूजन एवं आरती होगी और श्रद्धालुओं को उनके दिव्य दर्शन प्राप्त होंगे। संस्थानम परिसर को आकर्षक ढंग से सजाया जाएगा तथा भगवान श्रीकृष्ण के जीवन एवं लीलाओं पर आधारित झांकियां प्रस्तुत की जाएंगी। विशेष झूलों, बच्चों के लिए मनोरंजक आकर्षणों, सेवा-प्रसाद और विभिन्न स्टॉल की व्यवस्था रहेगी।