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अवैध निर्माण के खिलाफ निगम की कार्रवाई सिर्फ धोखा ः जगदीश ममगाई

प्रकाशित: 22-09-2026 | लेखक: वीर अर्जुन टीम
वीर अर्जुन संवाददाता
नई दिल्ली। शहरी मामलों के विशेषज्ञ व एकीकृत दिल्ली नगर निगम की निर्माण समिति के अध्यक्ष रहे जगदीश ममगांई ने कहां की राजधानी में अवैध निर्माण के खिलाफ कार्रवाई सिर्फ आंखों को धोखा देना है जबकि सिर्फ पिक और चूज किया जा रहा है और भ्रष्ट अधिकारियों की और ज्यादा मौज आ गई है वह अब जमकर भ्रष्टाचार कर रहे हैं और दिखाने की कोशिश यह हो रही है जैसा पता नहीं भ्रष्टाचार के खिलाफ कितना कड़ा अभियान चल रहा है जगदीश ने कहा राजधानी दिल्ली में अवैद्य संरचनाओं, आवासीय क्षेत्रों में वाणिज्यिक दुरुपयोग और संरचनात्मक उल्लंघनों के नाम पर एमसीडी द्वारा चुनिंदा (पिक एंड चूज) इमारतों को ध्वस्त व संपत्तियों को सील करने की कार्रवाई पर सवाल उठाया है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को लिखे पत्र में ममगांई ने सवाल उठाया कि दिल्ली में करीब 78 लाख आवासीय व व्यवसायिक इकाईयां निर्मित हैं, दो लाख के ही नक्शे पारित हैं, क्या लाखों अनधिकृत निर्माणों पर कार्रवाई की जा सकती है? अवैद्य वसूली कर पिछले 45 वर्षों में होने दिए लाखों अवैद्य निर्माणों में से कुछ लोगों को ही निशाना क्यों बनाया जा रहा है? इस समस्या को संरचनात्मक विफलता के रुप में नहीं देखा जा सकता, यह अनधिकृत निर्माणों की निगरानी, अंकुश लगाने की बजाए एमसीडी, पुलिस, अवैद्य फ्लैट बना बेचने वाले ठेकेदार व भूमाफिया की लेनदेन व गिरोहबंदी से उपजा है। मिलीभगत करके, बिना किसी मंज़ूरी और सुरक्षा नियमों का पालन किए बड़े पैमाने पर बहुमंज़िला इमारतें बनाई जाती हैं।
जगदीश मंगाई ने कहा इतने बड़े पैमाने पर तोड़फोड़, कार्रवाई हो नहीं सकती है, लिहाजा इन निर्माणों को कार्रवाई की बजाए विनियमित करने की आवश्यकता है। अवैध निर्माणों के संरक्षणार्थ राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली(विशेष प्रावधान) अधिनियम के तहत तोड़फोड़ रोकने को 31 दिसम्बर 2026 तक विस्तार दिया गया है। इस अधिनियम के चलते भी पिछले 20 वर्ष से अवैद्य निर्माण पर कार्रवाई के प्रति एमसीडी आदि सरकारी एजेंसी शिथिल हैं, हालांकि इसकी आड़ में वसूली होती रहती है। जब तक पुराने अवैद्य निर्माण, अनधिकृत कॉलोनियां नियमित नहीं होंगी तब तक नए हो रहे अवैद्य निर्माण पर कार्रवाई, अंकुश लगाना मुश्किल है। अनधिकृत कॉलोनियां, उनमें चल रही व्यावसायिक गतिविधियां समय की मांग हैं, अनधिकृत कॉलोनियों में रहने वाले लाखों लोगों के लिए यह न केवल आवासीय आवश्यकता है बल्कि रोजगार भी है। जगदीश ममगांई ने कहा है कि भारतीय संसद द्वारा पारित ‘दिल्ली नगर निगम अधिनियम 1957' गत 69 वर्ष में अप्रभावी व अप्रसांगिक हो गया है। इसमें आमूल-चूल परिवर्तन कर वर्तमान आवश्यकता के अनुरुप बनाना होगा, बेहतर है ‘मेयर-इन-काऊंसिल' हो। प्रतिनियुक्ति (डेपुटेशन) पर आए डीडीए अधिकारी भवन नियम प्रस्तावित करते हैं, केन्द्राrय शहरी विकास मंत्रालय अधिसूचित करता है।