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गुरु तेग बहादुर की वाणी में सत्य, निर्भयता और मानव गरिमा का संदेश : संधू

प्रकाशित: 22-09-2026 | लेखक: वीर अर्जुन टीम
वीर अर्जुन संवाददाता
नई दिल्ली। गुरु तेग बहादुर जी की वाणी केवल आध्यात्मिक संदेश नहीं, बल्कि सत्य, निर्भयता, करुणा और मानवीय गरिमा के लिए खड़े होने की प्रेरणा है। यह बात दिल्ली के उपराज्यपाल तरणजीत सिंह संधू ने सोमवार को हंसराज कॉलेज में आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी में कही। गुरु तेग बहादुर जी के 350वें शहादत दिवस के स्मरण में संस्कृति मंत्रालय, साहित्य अकादेमी और हंसराज कॉलेज के संयुक्त तत्वावधान में ‘श्री गुरु तेग बहादुर जी की वाणी' विषय पर संगोष्ठी हुई। संधू ने कहा कि गुरु साहिब की वाणी मनुष्य को भय से मुक्त होकर सत्य के साथ खड़े होने और दूसरों के अधिकार व सम्मान की रक्षा करने का साहस देती है। उनका बलिदान सत्य, स्वतंत्रता और मानवीय गरिमा की रक्षा के लिए सर्वोच्च त्याग का उदाहरण है। उन्होंने युवाओं से गुरु साहिब की वाणी को जीवन में उतारने और अपनी ऊर्जा समाज व मानवता के निर्माण में लगाने का आह्वान किया। प्रो. रमा ने कहा कि गुरु तेग बहादुर जी को इतिहास के एक अध्याय तक सीमित करने के बजाय जीवंत विचार और जीवन-दृष्टि के रूप में समझना जरूरी है। उन्होंने स्वतंत्र चिंतन, सहिष्णुता और मानवीय सम्मान को गुरु साहिब के चिंतन की प्रमुख विशेषताएं बताया। साहित्य अकादेमी अध्यक्ष माधव कौशिक ने ‘निर्भउ, निरवैर' और ‘सरबत का भला' के संदेश को रेखांकित करते हुए गुरु साहिब की वाणी को भारतीय आध्यात्मिक, सांस्कृतिक और साहित्यिक परंपरा की अमूल्य धरोहर बताया। संगोष्ठी में देशभर के विद्वानों और शिक्षाविदों ने गुरु साहिब की वाणी, शहादत, धार्मिक स्वतंत्रता, समानता और मानव गरिमा की समकालीन प्रासंगिकता पर विचार साझा किए।