भारत में सुपर अल नीनों की आहट से मंडराया जन जीवन पर खतरा
प्रकाशित: 23-09-2026 | लेखक: संपादकीय टीम
प्राकृतिक जलवायु परिवर्तन के कारण देश के मौसम का मिजाज अप्रत्याशित होने पर वैज्ञानिकों ने गहरी चिंता जताई है। भारत के 180 से अधिक पर्यावरण और पारिस्थितिकी वैज्ञानिकों ने वर्ष 26 - 27 में बेहद शक्तिशाली अल नीनो को लेकर देशवासियों को चेताया है। अल नीनो के कारण जलवायु परिवर्तन को लेकर मिलने वाली खबरे बेहद चौंका देने वाली है। अल नीनो प्रशांत महासागर से जुड़ी एक प्राकृतिक जलवायु घटना है। इसमें समुद्र की सतह का पानी सामान्य से अधिक गर्म हो जाता है। इसका असर दुनिया के कई हिस्सों के मौसम पर पड़ता है। एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक इससे भारत में तेज गर्मी, कम बारिश, जंगल, जानवरों, खेती और समुद्र पर गहरा असर पड़ सकता है। वैज्ञानिकों ने तुरंत पर्यावरण निगरानी बढ़ाने की मांग की है। वैज्ञानिकों ने सरकार, शोध संस्थानों और फंड देने वाली एजेंसियों से तुरंत तैयारी शुरू करने की अपील की है। उनका कहना है कि 2026-27 का अल नीनो भारत के जंगलों, नदियों, समुद्रों, पहाड़ों और वन्यजीवों पर गंभीर असर डाल सकता है। भारत में अल नीनो का संबंध अक्सर कमजोर या देर से आने वाले मानसून और अधिक गर्मी से देखा गया है। हालांकि हर अल नीनो का असर एक जैसा नहीं होता। वैज्ञानिकों के अनुसार इस बार प्रशांत महासागर में समुद्र का तापमान बहुत अधिक बढ़ रहा है, इसलिए आने वाले महीनों पर विशेष नजर रखने की जरूरत है। गर्मी और सूखे का सबसे ज्यादा असर उन इलाकों पर हो सकता है जहां पहले से ही पानी की कमी रहती है। रेगिस्तान और ऊंचे पहाड़ी क्षेत्रों में रहने वाले पौधों और जानवरों के लिए ऐसी स्थिति और कठिन हो सकती है। विश्व मौसम विज्ञान संगठन ने हाल ही कहा था कि मौजूदा अल नीनो की स्थिति आने वाले महीनों में बहुत मजबूत घटना में बदलने की सबसे अधिक संभावना है। इसके फरवरी 2027 तक बने रहने का अनुमान है।
जलवायु वैज्ञानिकों के अनुसार, 2026 का अल नीनो पिछले 150 वर्षों में सबसे शक्तिशाली हो सकता है। अमेरिकी राष्ट्रीय महासागरीय और वायुमंडलीय प्रशासन ने पुष्टि की है कि इस वर्ष की शुरुआत में ला नीना से अल नीनो में तेजी से परिवर्तन के बाद आधिकारिक तौर पर अल नीनो विकसित हो गया है, जो जलवायु विज्ञान में अपेक्षाकृत दुर्लभ परिवर्तन माना जाता है।
अल-नीनो 2026 केवल एक मौसम संबंधी बदलाव नहीं, बल्कि एक बड़ी आर्थिक चुनौती है। वैज्ञानिकों का मानना है कि ग्लोबल वार्मिंग और अल-नीनो की ‘कातिल जोड़ी' मौसम को और अधिक अनियंत्रित बना रही है। भारत जैसे विकासशील देश के लिए यह समय जल संरक्षण, जलवायु-अनुकूल कृषि पद्धतियों को अपनाने और भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार रहने का है। जलवायु परिवर्तन वास्तव में पृथ्वी पर जलवायु की परिस्थितियों में बदलाव को कहा जाता है। भूमि, वातावरण, उसके ताप, जल प्रणाली के ािढयाकलापों में ऐसे परिवर्तन हों जो जलवायु के कारण मानव के जीवन, उसके रहन-सहन को प्रभावित करने लगें तो उसे जलवायु परिवर्तन कहते हैं। जलवायु परिवर्तन पिछले कुछ सालों से बहुत ही गंभीर समस्या के रूप में उत्पन्न होता जा रहा है। जलवायु परिवर्तन के कई कारण होते हैं, जो बहुत से तरीकों से पृथ्वी में चल रहे जीवन को प्रभावित करते है। बदल रहे मौसम के कारण वर्षा के स्वरूप में भी बहुत बड़ा परिवर्तन हुआ है। यह उल्लेखनीय है जलवायु परिवर्तन के कारण पिछले कुछ सालों में भारत में बाढ़, गर्मी की लहरें, तूफान और सूखे जैसी आपदाएं बढ़ी हैं। इससे लाखों लोग प्रभावित हुए हैं और कृषि को भी नुकसान पहुंचा है। जलवायु परिवर्तन के कारण विगत कुछ वर्षो में मौसम की चरम प्रतिकूल परिस्थितियों - गर्मी, सूखा, बाढ़, ओलावृष्टि आदि घटानाओं में काफी बढ़ोतरी हुई है।
-बाल मुकुन्द ओझा,
जयपुर, राजस्थान।
जलवायु वैज्ञानिकों के अनुसार, 2026 का अल नीनो पिछले 150 वर्षों में सबसे शक्तिशाली हो सकता है। अमेरिकी राष्ट्रीय महासागरीय और वायुमंडलीय प्रशासन ने पुष्टि की है कि इस वर्ष की शुरुआत में ला नीना से अल नीनो में तेजी से परिवर्तन के बाद आधिकारिक तौर पर अल नीनो विकसित हो गया है, जो जलवायु विज्ञान में अपेक्षाकृत दुर्लभ परिवर्तन माना जाता है।
अल-नीनो 2026 केवल एक मौसम संबंधी बदलाव नहीं, बल्कि एक बड़ी आर्थिक चुनौती है। वैज्ञानिकों का मानना है कि ग्लोबल वार्मिंग और अल-नीनो की ‘कातिल जोड़ी' मौसम को और अधिक अनियंत्रित बना रही है। भारत जैसे विकासशील देश के लिए यह समय जल संरक्षण, जलवायु-अनुकूल कृषि पद्धतियों को अपनाने और भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार रहने का है। जलवायु परिवर्तन वास्तव में पृथ्वी पर जलवायु की परिस्थितियों में बदलाव को कहा जाता है। भूमि, वातावरण, उसके ताप, जल प्रणाली के ािढयाकलापों में ऐसे परिवर्तन हों जो जलवायु के कारण मानव के जीवन, उसके रहन-सहन को प्रभावित करने लगें तो उसे जलवायु परिवर्तन कहते हैं। जलवायु परिवर्तन पिछले कुछ सालों से बहुत ही गंभीर समस्या के रूप में उत्पन्न होता जा रहा है। जलवायु परिवर्तन के कई कारण होते हैं, जो बहुत से तरीकों से पृथ्वी में चल रहे जीवन को प्रभावित करते है। बदल रहे मौसम के कारण वर्षा के स्वरूप में भी बहुत बड़ा परिवर्तन हुआ है। यह उल्लेखनीय है जलवायु परिवर्तन के कारण पिछले कुछ सालों में भारत में बाढ़, गर्मी की लहरें, तूफान और सूखे जैसी आपदाएं बढ़ी हैं। इससे लाखों लोग प्रभावित हुए हैं और कृषि को भी नुकसान पहुंचा है। जलवायु परिवर्तन के कारण विगत कुछ वर्षो में मौसम की चरम प्रतिकूल परिस्थितियों - गर्मी, सूखा, बाढ़, ओलावृष्टि आदि घटानाओं में काफी बढ़ोतरी हुई है।
-बाल मुकुन्द ओझा,
जयपुर, राजस्थान।