उद्योग जगत केवल विस्तार नहीं, मजबूती और बेहतर संचालन पर भी ध्यान दे : सीतारमण
प्रकाशित: 23-09-2026 | लेखक: वीर अर्जुन टीम
नई दिल्ली, (भाषा)। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने मंगलवार को भारतीय उद्योग जगत से केवल कारोबार का विस्तार करने के बजाय मजबूत, टिकाऊ और बेहतर संचालन वाली कंपनियां बनाने पर ध्यान देने को कहा। उन्होंने कहा कि 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने के लिए उद्योग को इस दिशा में आगे बढ़ना होगा।
सीतारमण ने यहां एआईएमए (ऑल इंडिया मैनेजमेंट एसोसिएशन) के एक कार्पाम को संबोधित करते हुए कहा कि भारतीय उद्योग को ऐसे संस्थान और कंपनियां बनानी चाहिए, जिनमें बड़े पैमाने के साथ टिकाऊपन, बेहतर गुणवत्ता, अच्छा संचालन और मजबूत प्रौद्योगिकी क्षमता हो। उन्होंने कहा, ''भारत के पास आज बड़े बाजार का आकार, उद्यमिता का उत्साह और संस्थागत क्षमता है, जिससे वह कहीं अधिक ऊंचे लक्ष्य तय कर सकता है। इन क्षमताओं को देश की दीर्घकालिक क्षमता में कितनी सफलता से बदला जाता है, यह इस बात पर निर्भर करेगा कि योजनाओं और कार्यों को कितनी प्रभावी ढंग से अमल में लाया जाता है।'' वित्त मंत्री ने कहा कि देश के विकसित भारत की ओर बढ़ने के साथ आज बनाए जा रहे उद्यमों और संस्थानों की गुणवत्ता से भारतीय प्रबंधन के योगदान को आंका जाएगा। वित्त मंत्री ने उद्योग जगत से ऐसी कंपनियां बनाने पर ध्यान देने को कहा जो केवल बड़ी न हों, बल्कि प्रतिस्पर्धी, नवोन्मेषी, भरोसेमंद और मजबूत भी हों, ताकि आने वाले दशकों में भारत की आर्थिक वृद्धि में योगदान दे सकें। उन्होंने कहा कि अच्छा कंपनी संचालन केवल बाहरी नियमों को अपनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उन मानकों पर भी निर्भर करता है जिन्हें संस्थान खुद के लिए तय करते हैं। सीतारमण ने कहा कि कारोबार क्षेत्रों के बीच भरोसा मांगा नहीं जा सकता, बल्कि दोनों पक्षों के आचरण से उसे बनाया जाता है। उन्होंने कहा, ''कंपनियों को सरकार और नियामकों के साथ रचनात्मक तरीके से बातचीत करनी चाहिए। कानूनी रास्ता हमेशा उपलब्ध रहेगा, लेकिन हर असहमति की शुरुआत कानूनी विवाद से नहीं होनी चाहिए।
सीतारमण ने यहां एआईएमए (ऑल इंडिया मैनेजमेंट एसोसिएशन) के एक कार्पाम को संबोधित करते हुए कहा कि भारतीय उद्योग को ऐसे संस्थान और कंपनियां बनानी चाहिए, जिनमें बड़े पैमाने के साथ टिकाऊपन, बेहतर गुणवत्ता, अच्छा संचालन और मजबूत प्रौद्योगिकी क्षमता हो। उन्होंने कहा, ''भारत के पास आज बड़े बाजार का आकार, उद्यमिता का उत्साह और संस्थागत क्षमता है, जिससे वह कहीं अधिक ऊंचे लक्ष्य तय कर सकता है। इन क्षमताओं को देश की दीर्घकालिक क्षमता में कितनी सफलता से बदला जाता है, यह इस बात पर निर्भर करेगा कि योजनाओं और कार्यों को कितनी प्रभावी ढंग से अमल में लाया जाता है।'' वित्त मंत्री ने कहा कि देश के विकसित भारत की ओर बढ़ने के साथ आज बनाए जा रहे उद्यमों और संस्थानों की गुणवत्ता से भारतीय प्रबंधन के योगदान को आंका जाएगा। वित्त मंत्री ने उद्योग जगत से ऐसी कंपनियां बनाने पर ध्यान देने को कहा जो केवल बड़ी न हों, बल्कि प्रतिस्पर्धी, नवोन्मेषी, भरोसेमंद और मजबूत भी हों, ताकि आने वाले दशकों में भारत की आर्थिक वृद्धि में योगदान दे सकें। उन्होंने कहा कि अच्छा कंपनी संचालन केवल बाहरी नियमों को अपनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उन मानकों पर भी निर्भर करता है जिन्हें संस्थान खुद के लिए तय करते हैं। सीतारमण ने कहा कि कारोबार क्षेत्रों के बीच भरोसा मांगा नहीं जा सकता, बल्कि दोनों पक्षों के आचरण से उसे बनाया जाता है। उन्होंने कहा, ''कंपनियों को सरकार और नियामकों के साथ रचनात्मक तरीके से बातचीत करनी चाहिए। कानूनी रास्ता हमेशा उपलब्ध रहेगा, लेकिन हर असहमति की शुरुआत कानूनी विवाद से नहीं होनी चाहिए।