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चुनाव आयोग एसआईआर पर अतिरिक्त सुरक्षा उपाय तलाशे

प्रकाशित: 23-09-2026 | लेखक: वीर अर्जुन टीम
चुनाव आयोग एसआईआर पर अतिरिक्त सुरक्षा उपाय तलाशे
विधि संवाददाता
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने निर्वाचन आयोग से कहा कि दिल्ली में विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के तहत लोगों को लगभग यांत्रिक तरीके से नोटिस भेजे जा रहे हैं, लिहाजा उसे कुछ अतिरिक्त सुरक्षा उपाय तलाशने चाहिए।
प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने आयोग से कहा कि तार्किक विसंगति की पहचान करने के आधार के बारे में स्पष्टीकरण की आवश्यकता है। पीठ ने आयोग की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता डी.एस. नायडू से कहा, लोगों को लगभग यांत्रिक रूप से नोटिस भेजे जा रहे हैं। यह देखिए कि क्या कुछ अतिरिक्त सुरक्षा उपायों की आवश्यकता है। तार्किक विसंगति की पहचान करने के आधार के बारे में भी स्पष्टीकरण की आवश्यकता है। पीठ एक जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें आरोप लगाया गया था कि निर्वाचन आयोग और दिल्ली के मुख्य निर्वाचन अधिकारी मतदाताओं को नोटिस जारी किए जाने के विशिष्ट कारणों का उचित तरीके से खुलासा नहीं कर पाए हैं। अंजलि भारद्वाज और अमृता जोहरी की इस जनहित याचिका में यह भी मांग की गई है कि मतदाताओं के विवरण को 'तार्किक विसंगतियों' की श्रेणी में रखने के लिए अपनाए जाने वाले नियम, परिभाषाएं, कंप्यूटर आधारित प्रािढया और काम करने के तरीके सार्वजनिक किए जाएं।
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने कहा कि यह प्रािढया जिस तरीके की जा रही है, वह हैरान करने वाली है। उन्होंने कहा कि 33 लाख से अधिक मतदाताओं को मामूली कारणों के आधार पर नोटिस जारी किए गए हैं। भूषण ने कहा कि ये नोटिस मतदाताओं के लिए व्यावहारिक परेशानियां पैदा कर रहे हैं, क्योंकि इनमें विसंगतियों को दूर करने के लिए उन्हें निर्धारित 12 दस्तावेजों में से कोई एक दस्तावेज जमा करना जरूरी है।