सोनिया के खिलाफ वोटर लिस्ट विवाद में रिवीजन पिटीशन मंजूर
प्रकाशित: 22-09-2026 | लेखक: वीर अर्जुन टीम
विधि संवाददाता
नई दिल्ली। दिल्ली की एक अदालत ने 11 सितंबर, 2025 के मजिस्ट्रेट अदालत के उस आदेश को चुनौती देने वाली पुनरीक्षण याचिका सोमवार को स्वीकार कर ली, जिसमें कांग्रेस नेता सोनिया गांधी का नाम 1983 में भारतीय नागरिकता हासिल करने से तीन साल पहले मतदाता सूची में शामिल किए जाने के आरोप की जांच से इनकार किया गया था।
विशेष न्यायाधीश विशाल गोगने ने मजिस्ट्रेट अदालत के आदेश को बिना विस्तृत कारणों वाला बताते हुए रद्द कर दिया। इस आदेश में राउज एवेन्यू अदालत की सेंट्रल दिल्ली कोर्ट बार एसोसिएशन के उपाध्यक्ष अधिवक्ता विकास त्रिपाठी की ओर से दायर शिकायत को खारिज कर दिया गया था। न्यायाधीश ने कहा, संबंधित आदेश में कानून का सही तरीके से पालन नहीं किया गया। भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 175(3) के तहत जरूरी प्रािढया पूरी नहीं की गई, जिसमें संबंधित पुलिस अधिकारी का पक्ष सुनना और संबंधित थाने से स्थिति रिपोर्ट मंगाना शामिल था। उन्होंने कहा कि आदेश में कारणों का अभाव साफ दिखाई देता है, क्योंकि मजिस्ट्रेट ने कानून में दिए गए दोनों विकल्पों पर विचार नहीं किया। इनमें प्राथमिकी दर्ज करने का निर्देश देना या बीएनएसएस के तहत आगे की प्रािढया अपनाना शामिल था। न्यायाधीश ने कहा कि मजिस्ट्रेट ने शिकायत से किसी संज्ञेय अपराध के होने का पता चलने के मुख्य पहलू पर विचार करने के बजाय, नागरिकता के मुद्दे पर ध्यान केंद्रित किया। अदालत ने मामले को मजिस्ट्रेट के पास वापस भेज दिया, ताकि वह नई दलीलें सुनने के बाद तर्कपूर्ण आदेश पारित कर सकें। मामले में आगे की कार्यवाही के लिए 29 सितंबर की तारीख तय की गई है।
नई दिल्ली। दिल्ली की एक अदालत ने 11 सितंबर, 2025 के मजिस्ट्रेट अदालत के उस आदेश को चुनौती देने वाली पुनरीक्षण याचिका सोमवार को स्वीकार कर ली, जिसमें कांग्रेस नेता सोनिया गांधी का नाम 1983 में भारतीय नागरिकता हासिल करने से तीन साल पहले मतदाता सूची में शामिल किए जाने के आरोप की जांच से इनकार किया गया था।
विशेष न्यायाधीश विशाल गोगने ने मजिस्ट्रेट अदालत के आदेश को बिना विस्तृत कारणों वाला बताते हुए रद्द कर दिया। इस आदेश में राउज एवेन्यू अदालत की सेंट्रल दिल्ली कोर्ट बार एसोसिएशन के उपाध्यक्ष अधिवक्ता विकास त्रिपाठी की ओर से दायर शिकायत को खारिज कर दिया गया था। न्यायाधीश ने कहा, संबंधित आदेश में कानून का सही तरीके से पालन नहीं किया गया। भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 175(3) के तहत जरूरी प्रािढया पूरी नहीं की गई, जिसमें संबंधित पुलिस अधिकारी का पक्ष सुनना और संबंधित थाने से स्थिति रिपोर्ट मंगाना शामिल था। उन्होंने कहा कि आदेश में कारणों का अभाव साफ दिखाई देता है, क्योंकि मजिस्ट्रेट ने कानून में दिए गए दोनों विकल्पों पर विचार नहीं किया। इनमें प्राथमिकी दर्ज करने का निर्देश देना या बीएनएसएस के तहत आगे की प्रािढया अपनाना शामिल था। न्यायाधीश ने कहा कि मजिस्ट्रेट ने शिकायत से किसी संज्ञेय अपराध के होने का पता चलने के मुख्य पहलू पर विचार करने के बजाय, नागरिकता के मुद्दे पर ध्यान केंद्रित किया। अदालत ने मामले को मजिस्ट्रेट के पास वापस भेज दिया, ताकि वह नई दलीलें सुनने के बाद तर्कपूर्ण आदेश पारित कर सकें। मामले में आगे की कार्यवाही के लिए 29 सितंबर की तारीख तय की गई है।