टाटा मोटर्स में नौकरी के नाम पर ठगी गिरोह का भंडाफोड़
प्रकाशित: 07-09-2026 | लेखक: वीर अर्जुन टीम
वीर अर्जुन संवाददाता
नई दिल्ला। उत्तर जिले की वाहन चोरी निरोधक शाखा को गुप्त सूचना मिली कि संगम विहार झरोदा माजरा दिल्ली में एक फर्जी कॉल सेंटर चल रहा है जो टाटा मोटर्स और अन्य बड़ी कंपनियों में नौकरी दिलाने के नाम पर बेरोजगारों से ठगी कर रहा है। सूचना की पुष्टि के बाद पुलिस टीम ने वहां छापा मारा। छापे के दौरान सतीश चंदर मौर्य उर्फ करण उर्फ हरीश और अन्य फोन करने वाले कर्मचारी कॉल सेंटर चलाते हुए मिले। शुरुआती पूछताछ में पता चला कि बेरोजगार युवाओं को डाटा एंट्री ऑपरेटर डाटा एनालिस्ट वेब डिजाइनर और अकाउंटेंट जैसी नौकरियों का झांसा देकर भर्ती के अलग-अलग चरणों में पैसे देने के लिए उकसाया जाता था। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस उपायुक्त उत्तर जिला निहारिका भट्ट भारतीय पुलिस सेवा के निर्देशन में अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त प्रथम पुखराज कमल गुप्ता भारतीय पुलिस सेवा और अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त द्वितीय राम दुलेश मीणा और सहायक पुलिस आयुक्त अभियान विशेष धत्तरवाल और प्रभारी वाहन चोरी निरोधक शाखा निरीक्षक संजय कुमार गुप्ता के नेतृत्व में एक टीम बनाई गई जिसमें उपनिरीक्षक हीरा लाल उपनिरीक्षक दिनेश सिंह सहायक उपनिरीक्षक ओमप्रकाश हवलदार संदीप हवलदार रविंदर हवलदार शक्ति हवलदार आलोक महिला हवलदार पूजा और सिपाही पाम शामिल थे।
जांच के दौरान मिली जानकारी पर पुलिस टीम ने संगम विहार वजीराबाद दिल्ली में छापा मारा। छापे के दौरान 3 आरोपी फर्जी भर्ती का काम करते हुए और नौकरी चाहने वालों से फोन पर अलग-अलग बहानों से पैसे मांगते हुए मिले। जगह की तलाशी में 09 मोबाइल फोन 01 टैबलेट 07 एटीएम कार्ड 02 बैंक पासबुक 03 नोटबुक जिनमें मोबाइल नंबर लिखे थे और 6730 रुपये नकद बरामद हुए। आगे की जांच में पता चला कि आरोपी जॉब है सपोर्ट नाम की एप से नौकरी चाहने वालों का ब्यौरा ले रहे थे जहां उम्मीदवार अलग-अलग नौकरियों के लिए पंजीकरण करते थे। आरोपी खासतौर पर उन उम्मीदवारों को निशाना बनाते थे जिन्होंने टाटा मोटर्स में नौकरी के लिए आवेदन किया था और फिर खुद को भर्ती प्रािढया से जुड़ा बताकर फोन करते थे।
आरोपियों ने उम्मीदवारों को गुमराह किया और झूठ बोला कि भर्ती के अलग-अलग चरणों को पूरा करने के लिए पैसा देना जरूरी है और इस तरह अलग-अलग बहानों से बार-बार पैसे वसूलते रहे। जांच आगे बढ़ने पर पुलिस टीम को दो और आरोपियों के इस फर्जी भर्ती नेटवर्क में शामिल होने का पता चला। दोनों को बाद में ढूंढकर पकड़ लिया गया और उनकी भूमिका की गहराई से जांच की जा रही है। अन्य साथियों की पहचान वित्तीय लेन-देन का पता लगाने और ठगी की पूरी सीमा जानने के लिए आगे की जांच जारी है। आरोपियों ने बेरोजगारों को बड़ी कंपनियों में नौकरी का झांसा देकर ठगने का सुनियोजित तरीका अपनाया।
नई दिल्ला। उत्तर जिले की वाहन चोरी निरोधक शाखा को गुप्त सूचना मिली कि संगम विहार झरोदा माजरा दिल्ली में एक फर्जी कॉल सेंटर चल रहा है जो टाटा मोटर्स और अन्य बड़ी कंपनियों में नौकरी दिलाने के नाम पर बेरोजगारों से ठगी कर रहा है। सूचना की पुष्टि के बाद पुलिस टीम ने वहां छापा मारा। छापे के दौरान सतीश चंदर मौर्य उर्फ करण उर्फ हरीश और अन्य फोन करने वाले कर्मचारी कॉल सेंटर चलाते हुए मिले। शुरुआती पूछताछ में पता चला कि बेरोजगार युवाओं को डाटा एंट्री ऑपरेटर डाटा एनालिस्ट वेब डिजाइनर और अकाउंटेंट जैसी नौकरियों का झांसा देकर भर्ती के अलग-अलग चरणों में पैसे देने के लिए उकसाया जाता था। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस उपायुक्त उत्तर जिला निहारिका भट्ट भारतीय पुलिस सेवा के निर्देशन में अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त प्रथम पुखराज कमल गुप्ता भारतीय पुलिस सेवा और अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त द्वितीय राम दुलेश मीणा और सहायक पुलिस आयुक्त अभियान विशेष धत्तरवाल और प्रभारी वाहन चोरी निरोधक शाखा निरीक्षक संजय कुमार गुप्ता के नेतृत्व में एक टीम बनाई गई जिसमें उपनिरीक्षक हीरा लाल उपनिरीक्षक दिनेश सिंह सहायक उपनिरीक्षक ओमप्रकाश हवलदार संदीप हवलदार रविंदर हवलदार शक्ति हवलदार आलोक महिला हवलदार पूजा और सिपाही पाम शामिल थे।
जांच के दौरान मिली जानकारी पर पुलिस टीम ने संगम विहार वजीराबाद दिल्ली में छापा मारा। छापे के दौरान 3 आरोपी फर्जी भर्ती का काम करते हुए और नौकरी चाहने वालों से फोन पर अलग-अलग बहानों से पैसे मांगते हुए मिले। जगह की तलाशी में 09 मोबाइल फोन 01 टैबलेट 07 एटीएम कार्ड 02 बैंक पासबुक 03 नोटबुक जिनमें मोबाइल नंबर लिखे थे और 6730 रुपये नकद बरामद हुए। आगे की जांच में पता चला कि आरोपी जॉब है सपोर्ट नाम की एप से नौकरी चाहने वालों का ब्यौरा ले रहे थे जहां उम्मीदवार अलग-अलग नौकरियों के लिए पंजीकरण करते थे। आरोपी खासतौर पर उन उम्मीदवारों को निशाना बनाते थे जिन्होंने टाटा मोटर्स में नौकरी के लिए आवेदन किया था और फिर खुद को भर्ती प्रािढया से जुड़ा बताकर फोन करते थे।
आरोपियों ने उम्मीदवारों को गुमराह किया और झूठ बोला कि भर्ती के अलग-अलग चरणों को पूरा करने के लिए पैसा देना जरूरी है और इस तरह अलग-अलग बहानों से बार-बार पैसे वसूलते रहे। जांच आगे बढ़ने पर पुलिस टीम को दो और आरोपियों के इस फर्जी भर्ती नेटवर्क में शामिल होने का पता चला। दोनों को बाद में ढूंढकर पकड़ लिया गया और उनकी भूमिका की गहराई से जांच की जा रही है। अन्य साथियों की पहचान वित्तीय लेन-देन का पता लगाने और ठगी की पूरी सीमा जानने के लिए आगे की जांच जारी है। आरोपियों ने बेरोजगारों को बड़ी कंपनियों में नौकरी का झांसा देकर ठगने का सुनियोजित तरीका अपनाया।