सीबीआई ने 42 करोड़ के ठगी मामलों में पांच को गिरफ्तार किया
प्रकाशित: 07-09-2026 | लेखक: वीर अर्जुन टीम
नई दिल्ली , (वीअ)। केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने 'डिजिटल अरेस्ट' ठगी के तीन मामलों में पांच और लोगों को गिरफ्तार किया है, जिनमें पीड़ितों से कथित तौर पर 42 करोड़ रुपये से अधिक की ठगी की गई थी। इन मामलों में अब तक गिरफ्तार लोगों की संख्या बढ़कर आठ हो गई है। एजेंसी ने रविवार को यह जानकारी दी।
ये गिरफ्तारियां संगठित साइबर अपराध नेटवर्क के खिलाफ सीबीआई के राष्ट्रव्यापी अभियान 'ऑपरेशन पा-छह' के तहत की गई हैं, जिसका उद्देश्य 'डिजिटल अरेस्ट' धोखाधड़ी में शामिल गिरोहों पर कार्रवाई करना है। सीबीआई ने बताया कि ये नवीनतम गिरफ्तारियां तीनों मामलों में 20 राज्यों में 89 स्थानों पर छापेमारी के बाद हुईं। एजेंसी प्रवक्ता बीना यादव ने बताया कि हाल में गिरफ्तार किए गए पांच आरोपी कथित तौर पर ठगी की रकम प्राप्त करने, उसे विभिन्न खातों में घुमाने और आगे भेजने में शामिल थे।
उन्होंने बताया कि मध्य प्रदेश के इटारसी निवासी संकेत बस्तवार और पंकज दामाडे ने कथित तौर पर एक बैंक खाते का इंतजाम किया, उसमें 'डिजिटल अरेस्ट' ठगी की रकम प्राप्त की और धनराशि को अलग-अलग खातों में भेजने में भूमिका निभाई, ताकि रकम के स्रोत का पता लगाना मुश्किल हो सके।
उन्होंने बताया कि अन्य तीन आरोपी-नयी दिल्ली निवासी आरिफ उर्फ किंग भाई, हरीश पुरुषोत्तम यादव उर्फ हैरी और उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद निवासी शशांक सिंह से रकम प्राप्त करने के लिए इस्तेमाल किया गया बैंक खाता कथित तौर पर मुहैया कराया और बाद में कई खातें के जरिये रकम को इधर-उधर किया।
सीबीआई ने कहा कि इन तीनों ने खाताधारक के मोबाइल फोन में एक दुर्भावनापूर्ण एपीके फाइल भी इंस्टॉल की।
एजेंसी ने आरोप लगाया कि इस सॉफ्टवेयर की मदद से आरोपी बैंक के एसएमएस अलर्ट को बीच में रोक सकते थे और गुप्त रूप से बैंक खाते का संचालन कर सकते थे।
एजेंसी ने कहा, ''जांच से अब उस विस्तृत संगठित नेटवर्क का पता चल रहा है, जिसका ये लोग हिस्सा थे और यह भी सामने आ रहा है कि नेटवर्क ने पूरी रकम को किस तरह एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाया।'' तीनों मामलों में पिलानी स्थित बिट्स, गुजरात और कर्नाटक के पीड़ित शामिल हैं। आरोप है कि ठगों ने खुद को पुलिस अधिकारी बताकर पीड़ितों को लंबे समय तक ''डिजिटल अरेस्ट'' में रखा।
ये गिरफ्तारियां संगठित साइबर अपराध नेटवर्क के खिलाफ सीबीआई के राष्ट्रव्यापी अभियान 'ऑपरेशन पा-छह' के तहत की गई हैं, जिसका उद्देश्य 'डिजिटल अरेस्ट' धोखाधड़ी में शामिल गिरोहों पर कार्रवाई करना है। सीबीआई ने बताया कि ये नवीनतम गिरफ्तारियां तीनों मामलों में 20 राज्यों में 89 स्थानों पर छापेमारी के बाद हुईं। एजेंसी प्रवक्ता बीना यादव ने बताया कि हाल में गिरफ्तार किए गए पांच आरोपी कथित तौर पर ठगी की रकम प्राप्त करने, उसे विभिन्न खातों में घुमाने और आगे भेजने में शामिल थे।
उन्होंने बताया कि मध्य प्रदेश के इटारसी निवासी संकेत बस्तवार और पंकज दामाडे ने कथित तौर पर एक बैंक खाते का इंतजाम किया, उसमें 'डिजिटल अरेस्ट' ठगी की रकम प्राप्त की और धनराशि को अलग-अलग खातों में भेजने में भूमिका निभाई, ताकि रकम के स्रोत का पता लगाना मुश्किल हो सके।
उन्होंने बताया कि अन्य तीन आरोपी-नयी दिल्ली निवासी आरिफ उर्फ किंग भाई, हरीश पुरुषोत्तम यादव उर्फ हैरी और उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद निवासी शशांक सिंह से रकम प्राप्त करने के लिए इस्तेमाल किया गया बैंक खाता कथित तौर पर मुहैया कराया और बाद में कई खातें के जरिये रकम को इधर-उधर किया।
सीबीआई ने कहा कि इन तीनों ने खाताधारक के मोबाइल फोन में एक दुर्भावनापूर्ण एपीके फाइल भी इंस्टॉल की।
एजेंसी ने आरोप लगाया कि इस सॉफ्टवेयर की मदद से आरोपी बैंक के एसएमएस अलर्ट को बीच में रोक सकते थे और गुप्त रूप से बैंक खाते का संचालन कर सकते थे।
एजेंसी ने कहा, ''जांच से अब उस विस्तृत संगठित नेटवर्क का पता चल रहा है, जिसका ये लोग हिस्सा थे और यह भी सामने आ रहा है कि नेटवर्क ने पूरी रकम को किस तरह एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाया।'' तीनों मामलों में पिलानी स्थित बिट्स, गुजरात और कर्नाटक के पीड़ित शामिल हैं। आरोप है कि ठगों ने खुद को पुलिस अधिकारी बताकर पीड़ितों को लंबे समय तक ''डिजिटल अरेस्ट'' में रखा।