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अच्छी ड्रैग फ्लिकर बनने के पीछे कुश्ती की विरासत, तीन दिग्गजों का मार्गदर्शन : दीपिका

प्रकाशित: 24-09-2026 | लेखक: वीर अर्जुन टीम
नई दिल्ली, (भाषा)। एशियाई खेलों में तीन मैचों में 20 गोल करने के साथ एक मैच में सर्वाधिक नौ गोल का रिकॉर्ड बनाने वाली भारतीय महिला हॉकी टीम की स्टार ड्रैग फ्लिकर दीपिका ने कहा कि परिवार में कुश्ती की विरासत ने उन्हें ताकत दी लेकिन कौशल के पीछे उनकी मेहनत और तीन दिग्गजों का मार्गदर्शन है।
एशियाई खेलों में थाईलैंड के खिलाफ पूल बी के मैच में 20-1 से मिली जीत में रिकॉर्ड नौ गोल करने वाली दीपिका ने उजबेकिस्तान के खिलाफ पहले मैच में आठ गोल का अपना ही रिकॉर्ड बेहतर किया। उन्होंने जापान के काकामिगाहारा से भाषा को दिये इंटरव्यू में कहा, पहले मैच में आठ गोल किये तो भी मुझे पता ही नहीं था कि रिकॉर्ड बना है। मैं बस ये सोच रही थी कि जितने पेनल्टी कॉर्नर मिले हैं, उन पर गोल करने हैं। जब साथी खिलाड़ियों ने बताया तब पता चला कि रिकॉर्ड बनाया है। 23 वर्ष की इस खिलाड़ी ने कहा, इस मैच में भी मुझे नहीं पता चला कि मैने कितने गोल किये। मैच के बाद टीम हरडल में कोच शोर्ड मारिन ने बधाई दी और कहा कि मैने अपना ही विश्व रिकॉर्ड बेहतर किया है। उन्होंने कहा, खेलते समय दिमाग में नहीं रहता कि कितने गोल किये हैं। फोकस इसी पर रहता है कि हर बार लक्ष्य हासिल करना है और उसके बाद अगले लक्ष्य की ओर बढना है। दीपिका ने एक अच्छी ड्रैग फ्लिकर बनने का श्रेय बचपन के कोच आजाद सिंह, भारत के बेहतरीन ड्रैग फ्लिकर रहे रूपिंदर पाल सिंह और भारतीय महिला हॉकी ड्रैग फ्लिकरों के साथ काम कर रहे डच धुरंधर ताइके ताकेमा को दिया। उन्होंने कहा, आजाद सर को लगा कि मैं ड्रैग फ्लिकर बन सकती हूं क्योंकि पहलवानों के परिवार होने के कारण ताकत तो कुदरती थी। रूपिंदर भैया ने ड्रैग को समझाया और बेसिक्स वहीं से स्पष्ट हुए। ताकेमा ने और वैरिएशन और फुटवर्क और मानसिक पहलू पर भी काम किया। इन तीनों का अहम रोल रहा है मेरे कैरियर में। दीपिका के पिता चाहते थे कि वह भी परिवार की परंपरा का पालन करके कुश्ती खेले और उन्हें उनके भाई के साथ हिसार में साइ केंद्र ले जाते थे लेकिन आठ साल की उम्र में मैदान पर लड़कियों को हॉकी खेलते देखकर उनकी रूचि जगी। यह पूछने पर कि क्या कुश्ती में भी इतनी कामयाब होती, उन्होंने कहा, अगर हॉकी नहीं खेलती तो कुश्ती खिलाड़ी ही होती। लेकिन हॉकी ने इतना कुछ दिया है तो कह नहीं सकती कि कुश्ती में इस स्तर पर खेलती या कामयाब होती या नहीं।