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भारत पर टैक्स अमेरिका किसी का सगा नहीं

प्रकाशित: 20-09-2026 | लेखक: आदित्य नरेंद्र
भारत पर टैक्स अमेरिका किसी का सगा नहीं
आदित्य नरेन्द्र
अमेरिका ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि वह अपने हितों को सबसे उपर रखता है। यदि उसके हितों को आंच आए तो वह किसी का सगा नहीं है। मामला रूस से क्रूड आयल, गैस खरीदने का है। अमेरिका का कहना है कि कई देश रूस से तेल, गैस खरीदकर उक्रेन के खिलाफ उसकी युद्ध क्षमता को बढ़ा रहे हैं। इसे रोकने के लिए अमेरिकी संसद ने उस बिल को मंजूरी दे दी है जो राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर 100 फीसदी टैरिफ लगाने की अनुमति देता है। हाउस आफ रिप्रजेंटेटिव ने इसे 159 के मुकाबले 262 वोटों से मंजूरी दे दी है। इससे पहले 7 अगस्त को अमेरिकी सीनेट इसे 11 के मुकाबले 86 वोटों से पास कर चुकी है। अब इसे राष्ट्रपति के पास हस्ताक्षर के लिए भेजा जा सकेगा। उल्लेखनीय है कि सीनेट के पास इस बिल में रूस के तेल और गैस के सबसे बड़े खरीददारों का नाम सीधे नहीं दिया गया है। इसमें वॉल्यूम के आधार पर रूस के पांच सबसे बड़े तेल और गैस खरीददारों पर 100 फीसदी तक टैरिफ लगाने का अधिकार देने का प्रावधान है। इस बिल के तहत चीन, भारत, हंगरी, स्लोवाकिया और अजरबेजान संभावित रूप से निशाने पर आ सकते हैं। इस बिल को लेकर विदेश मंत्रालय ने कहा है कि भारत सरकार इस मामले में आगे होने वाले घटनाक्रम पर निगाह रख रही है। जैसा कि पहले भी कई मौकों पर कहा गया है कि भारत अपने 140 करोड़ लोगों की ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए प्रतिद्ध है। बदलती बाजार परिस्थितियों और विविध स्रोतों से आपूर्ति के आधार पर भारत ऐसा करना जारी रखेगा। भारत ने कहा कि हाल के महीनों में अमेरिकी सरकार के अलग-अलग प्रतिनिधियों के साथ उच्च स्तर पर इस मुद्दे पर चर्चा हुई है। भारत की ओर से इस कानून के संभावित प्रभावों को न केवल द्विपक्षीय संबंधों बल्कि अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा बाजार के लिहाज से भी स्पष्ट रूप से सामने रखा गया है। भारत ने अपने व्यापार और आर्थिक हितों की रक्षा के लिए सभी जरूरी कदम उठाने का संकल्प भी स्पष्ट कर दिया है। सरकार इन घटनाक्रमों के प्रभाव से निपटने के लिए भारतीय बाजार और उद्योग संघों के साथ मिलकर काम करेगी। इस बिल को पास कराने के लिए रिपब्लिकन और डेमोक्रेट्स सांसदों ने हाथ मिला लिया है। अमेरिकी टैरिफ के निशाने पर वह पांच देश होंगे जो कानून लागू होने की तारीख से पहले के 12 महीनों में रूस से मिलने वाले क्रूड आयल या गैस की कुल आयात की मात्रा के आधार पर सबसे बड़े आयातक रहे हो और जिन्होंने बिल के कानून बनने के 30 दिनों के बाद भी रूस से कच्चे तेल की नई खरीद जानबूझकर की हो। जिन देशों का गैस आयात रूस के कुल गैस निर्यात के 15 फीसदी से कम है उन्हें इन प्रतिबंधों से छूट दी जाएगी। अब जरा अमेरिका की चालाकी देखिए, वह यूरोपीय यूनियन को एक ईकाई नहीं बल्कि अलग-अलग देश मानकर छूट दे रहा है। क्रूड आयल के मामले में चीन, भारत, हंगरी, स्लोवाकिया और अजरबेजान में से चीन और भारत ही ऐसे देश हैं जो रूस से सबसे ज्यादा तेल खरीदते हैं। अमेरिका अगर चीन पर प्रतिबंध लगाएगा तो चीन भी उस पर प्रतिबंध लगाकर उसी के लहजे में जवाब देगा। जहां तक भारत का सवाल है तो 100 प्रतिशत तक के टैरिफ भारतीय निर्यातकों को नुकसान पहुंचा सकते हैं। अमेरिका के साथ व्यापार करके हम फायदे में रहते हैं। इस बात को अमेरिका और भारत दोनों जानते हैं, तो फिर क्या अमेरिका अपने इस टैरिफ की आड़ में भारत को मुक्त व्यापार समझौते में अपनी शर्तें मनवाने के लिए बाध्य करने की कोशिश कर सकता है। अभी इस बात का जवाब देना मुश्किल है परंतु यदि ट्रंप के पिछले डेढ़ साल के कार्यकाल को देखा जाए तो कोई ऐसा सगा नहीं जिसे अमेरिका ने ठगा नहीं।