वर्षों से राष्ट्र की सेवा में समर्पित Virarjun अर्जुनस्य प्रतिज्ञे द्वे, न दैन्यं, न पलायनम् ।

ब्रिक्स सम्मेलन के मौके पर सदस्य और साझेदार देशों की सांस्कृतिक विरासत की झलक

प्रकाशित: 13-09-2026 | लेखक: वीर अर्जुन टीम
नई दिल्ली, (भाषा)। दिल्ली में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के अवसर पर लगाए गए हस्तशिल्प बाजार में सदस्य और साझेदार देशों की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत की झलक देखने को मिल रही है।
मिट्टी से कलाकृतियां बनाने वाली ब्राजील की सदियों पुरानी कला से लेकर बेलारूस की पारंपरिक विलो वीविंग तक के हस्तशिल्प इस बाजार में प्रदर्शित किए गए हैं। विलो वीविंग पेड़ की लचीली और पतली टहनियों को आपस में बुनकर उपयोगी और सजावटी वस्तुएं बनाने की पारंपरिक कला है। इन टहनियों से टोकरियां, फर्नीचर, सजावटी सामान और घरेलू उपयोग की अन्य वस्तुएं बनाई जाती हैं। यह बेलारूस की पुरानी लोक कलाओं में शामिल है। भारत मंडपम के पास स्थित राष्ट्रीय शिल्प संग्रहालय एवं हस्तकला अकादमी परिसर में यह बाजार लगाया गया है। भारत ने एक जनवरी को ब्रिक्स की अध्यक्षता संभाली थी और वर्ष 2026 में समूह की स्थापना के 20 वर्ष भी पूरे हो रहे हैं। ब्रिक्स-2026 की आधिकारिक वेबसाइट में कहा गया कि बाजार में सदस्य और साझेदार देशों के कारीगरों, डिजाइनरों और रचनात्मक उद्यमों के उत्पाद प्रदर्शित किए गए हैं। इनमें हस्तशिल्प, हथकरघा, वस्त्र, कलाकृतियां और अन्य पारंपरिक उत्पाद शामिल हैं। यह बाजार 10 सितंबर से शुरू हुआ है और 15 सितंबर तक लगा रहेगा। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग, ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान, दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामाफोसा और कई अन्य नेता 12 और 13 सितंबर को हो रहे ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में शामिल हो रहे हैं। बेलारूस की ओर से मोलोडेचनो की प्रसिद्ध विलो वीविंग लाना स्लास्त्सियोन ने वर्बाच्का लोक शिल्प समूह का प्रतिनिधित्व किया है।