शुभेन्दु अधिकारीः राष्ट्रवाद का नया पुरोधा
प्रकाशित: 13-09-2026 | लेखक: आदित्य नरेंद्र
आदित्य नरेन्द्र
पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री के रूप में देश को राष्ट्रवाद का एक नया पुरोधा मिल गया है जो उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और असम के मुख्यमंत्री हिमंता विस्व सरमा की तर्ज पर ही बिना देरी किए कड़े फैसले लेने से नहीं हिचकिचाता। इसी के चलते देखते ही देखते शुभेंदु अधिकारी देश भर के राष्ट्रवादियों के नायक बन गए हैं। कहने को तो शुभेंदु अधिकारी बंगाल के मुख्यमंत्री हैं लेकिन उनके समर्थक पूरे देश में हैं जिनकी संख्या दिन पर दिन बढ़ती ही जा रही है पिछले दिनों शुभेंदु ने एक बड़ी रैली का नेतृत्व किया जिसमें भाजपा नेता व कार्यकर्ताओं के साथ ही आम लोग व साधु-संत बड़ी संख्या में शामिल हुए। कोलकाता में लगभग तीन किलोमीटर लम्बी इस रैली को गेरूआ सम्मान यात्रा का नाम दिया गया था। इस रैली में भगवा कपड़े पहने शुभेंदु सबसे आगे चल रहे थे। आयोजकों के अनुसार इस यात्रा का उद्देश्य भगवा रंग के सम्मान, गरिमा और सनातन के आदर्शों की रक्षा करना और समाज में इसके महत्व के प्रति जागरुकता फैलाना है। हाल ही में जादवपुर यूनिवर्सिटी परिसर में वामपंथी छात्र संगठनों और एबीवीपी के बीच हुए नारों और पोस्टरों के विवाद तथा एक मीडिया हाउस द्वारा भगवा रंग को लेकर की गई टिप्पणी के विरोध स्वरूप इस यात्रा को राजनीतिक और सांस्कृतिक संदेश के रूप में देखा जा रहा है। पश्चिम बंगाल में बागेश्वर धाम वाले पंडित धीरेन्द्र शास्त्री की तस्वीर जलाने और जूते-चप्पल से मारने के मामले में अधिकारी ने कहा कि साधु-संत समाज का अपमान किया गया है। संत धीरेन्द्र शास्त्राr ने देश प्रेम, राष्ट्रवाद, अखंड भारत और अपनी परंपरा व संस्कृति की बात अपने तरीके से रखी। उन्होंने कहा कि जिसे मानना है कि वह मानेगा और जिसे नहीं मानना वह नहीं मानेगा। किसी पर कुछ थोपने की कोशिश नहीं की गई। उन्होंने पुलिस कमिश्नर से कहा कि ऐसे लोगों को गिरफ्तार किया जाना चाहिए। इसी तरह का कड़ा रुख उन्होंने जादवपुर यूनिवर्सिटी के मामले में भी अपनाया। उन्होंने कहा कि देश विरोधी ताकतों का समर्थन करने वालों का इलाज जरूरी हो गया है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि इस यूनिवर्सिटी में कश्मीर मांगे आजादी जैसे नारे लगाए गए तो सरकार महात्मा गांधी नहीं बल्कि नेताजी सुभाष चंद्र बोस की भाषा में जवाब देगी। भारत तेरे टुकड़े होंगे का नारा लगाने वालों के टुकड़े-टुकड़े कर दिए जाएंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि जादवपुर यूनिवर्सिटी में धमकाने की संस्कृति को खत्म करने का वक्त आ गया है। उन्होंने टीएमसी और वामपंथी सरकारों पर राष्ट्रवाद और राज्य की परंपराओं को कमजोर करने का आरोप भी लगाया। उन्होंने कहा कि जो लोग भगवा रंग का अपमान करते हैं उन्हें धार्मिक कार्यक्रमों के जरिए सबक सिखाया जाना चाहिए। मैं गीता और हनुमान चालीसा के पाठ के जरिए उन्हें सबक सिखाने फिर आऊंगा। यह स्वामी विवेकानंद की भूमि है और यहां भगवा रंग हमेशा कायम रहेगा। शुभेंदु ने तीन दिन के वैदिक पाठ की घोषणा भी की और लोगों से इसमें बड़ी संख्या में हिस्सा लेने की अपील की। कुछ समय पहले मुख्यमंत्री एक और विशेष कार्यक्रम में शामिल हुए थे जिसमें लगभग दस हजार लोगों ने वंदे मातरम के पूर्ण संस्करण का सामूहिक गायन किया था। अपने राष्ट्रवादी फैसलों की शुरुआत शुभेंदु अधिकारी ने सत्ता संभालने के साथ ही शुरू कर दी थी। मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के बाद उन्होंने पहला फैसला बीएसएफ को जमीन देने का किया था ताकि बंगलादेश से होने वाली अवैध घुसपैठ को बाड़ लगाकर रोका जा सके। चांकि पश्चिम बंगाल बार्डर स्टेट है ऐसे में यदि इस क्षेत्र को बंगलादेश और म्यांमार के घुसपैठियों से सुरक्षित रखना है तो यहां राष्ट्रवाद को बढ़ावा देना ही होगा। शुभेंदु अधिकारी इसी काम में लगे हैं।
पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री के रूप में देश को राष्ट्रवाद का एक नया पुरोधा मिल गया है जो उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और असम के मुख्यमंत्री हिमंता विस्व सरमा की तर्ज पर ही बिना देरी किए कड़े फैसले लेने से नहीं हिचकिचाता। इसी के चलते देखते ही देखते शुभेंदु अधिकारी देश भर के राष्ट्रवादियों के नायक बन गए हैं। कहने को तो शुभेंदु अधिकारी बंगाल के मुख्यमंत्री हैं लेकिन उनके समर्थक पूरे देश में हैं जिनकी संख्या दिन पर दिन बढ़ती ही जा रही है पिछले दिनों शुभेंदु ने एक बड़ी रैली का नेतृत्व किया जिसमें भाजपा नेता व कार्यकर्ताओं के साथ ही आम लोग व साधु-संत बड़ी संख्या में शामिल हुए। कोलकाता में लगभग तीन किलोमीटर लम्बी इस रैली को गेरूआ सम्मान यात्रा का नाम दिया गया था। इस रैली में भगवा कपड़े पहने शुभेंदु सबसे आगे चल रहे थे। आयोजकों के अनुसार इस यात्रा का उद्देश्य भगवा रंग के सम्मान, गरिमा और सनातन के आदर्शों की रक्षा करना और समाज में इसके महत्व के प्रति जागरुकता फैलाना है। हाल ही में जादवपुर यूनिवर्सिटी परिसर में वामपंथी छात्र संगठनों और एबीवीपी के बीच हुए नारों और पोस्टरों के विवाद तथा एक मीडिया हाउस द्वारा भगवा रंग को लेकर की गई टिप्पणी के विरोध स्वरूप इस यात्रा को राजनीतिक और सांस्कृतिक संदेश के रूप में देखा जा रहा है। पश्चिम बंगाल में बागेश्वर धाम वाले पंडित धीरेन्द्र शास्त्री की तस्वीर जलाने और जूते-चप्पल से मारने के मामले में अधिकारी ने कहा कि साधु-संत समाज का अपमान किया गया है। संत धीरेन्द्र शास्त्राr ने देश प्रेम, राष्ट्रवाद, अखंड भारत और अपनी परंपरा व संस्कृति की बात अपने तरीके से रखी। उन्होंने कहा कि जिसे मानना है कि वह मानेगा और जिसे नहीं मानना वह नहीं मानेगा। किसी पर कुछ थोपने की कोशिश नहीं की गई। उन्होंने पुलिस कमिश्नर से कहा कि ऐसे लोगों को गिरफ्तार किया जाना चाहिए। इसी तरह का कड़ा रुख उन्होंने जादवपुर यूनिवर्सिटी के मामले में भी अपनाया। उन्होंने कहा कि देश विरोधी ताकतों का समर्थन करने वालों का इलाज जरूरी हो गया है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि इस यूनिवर्सिटी में कश्मीर मांगे आजादी जैसे नारे लगाए गए तो सरकार महात्मा गांधी नहीं बल्कि नेताजी सुभाष चंद्र बोस की भाषा में जवाब देगी। भारत तेरे टुकड़े होंगे का नारा लगाने वालों के टुकड़े-टुकड़े कर दिए जाएंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि जादवपुर यूनिवर्सिटी में धमकाने की संस्कृति को खत्म करने का वक्त आ गया है। उन्होंने टीएमसी और वामपंथी सरकारों पर राष्ट्रवाद और राज्य की परंपराओं को कमजोर करने का आरोप भी लगाया। उन्होंने कहा कि जो लोग भगवा रंग का अपमान करते हैं उन्हें धार्मिक कार्यक्रमों के जरिए सबक सिखाया जाना चाहिए। मैं गीता और हनुमान चालीसा के पाठ के जरिए उन्हें सबक सिखाने फिर आऊंगा। यह स्वामी विवेकानंद की भूमि है और यहां भगवा रंग हमेशा कायम रहेगा। शुभेंदु ने तीन दिन के वैदिक पाठ की घोषणा भी की और लोगों से इसमें बड़ी संख्या में हिस्सा लेने की अपील की। कुछ समय पहले मुख्यमंत्री एक और विशेष कार्यक्रम में शामिल हुए थे जिसमें लगभग दस हजार लोगों ने वंदे मातरम के पूर्ण संस्करण का सामूहिक गायन किया था। अपने राष्ट्रवादी फैसलों की शुरुआत शुभेंदु अधिकारी ने सत्ता संभालने के साथ ही शुरू कर दी थी। मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के बाद उन्होंने पहला फैसला बीएसएफ को जमीन देने का किया था ताकि बंगलादेश से होने वाली अवैध घुसपैठ को बाड़ लगाकर रोका जा सके। चांकि पश्चिम बंगाल बार्डर स्टेट है ऐसे में यदि इस क्षेत्र को बंगलादेश और म्यांमार के घुसपैठियों से सुरक्षित रखना है तो यहां राष्ट्रवाद को बढ़ावा देना ही होगा। शुभेंदु अधिकारी इसी काम में लगे हैं।