सेबी ने वायदा-विकल्प सौदों के निपटान मूल्य तय करने की पद्धति में बदलाव का प्रस्ताव रखा
प्रकाशित: 13-09-2026 | लेखक: वीर अर्जुन टीम
नई दिल्ली, (भाषा)। बाजार नियामक भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) ने शनिवार को सूचकांक और शेयर वायदा-विकल्प सौदों के समाप्ति दिवस पर निपटान मूल्य तय करने की पद्धति में बदलाव का प्रस्ताव रखा।
यह प्रस्ताव हाल में शुरू किए गए क्लोजिंग ऑक्शन सत्र (सीएएस) की समीक्षा के बाद रखा गया है। सेबी ने परामर्श पत्र में निपटान मूल्य तय करने के लिए दो विकल्प सुझाए हैं। पहला विकल्प लगातार कारोबार वाले सत्र (सीटीएस) के अंतिम 30 मिनट और 10 मिनट के सीएएस में हुए सौदों के आधार पर संयुक्त मात्रा भारित औसत कीमत (वीडब्ल्यूएपी) तय करना है। दूसरा विकल्प मौजूदा सीटीएस वीडब्ल्यूएपी पद्धति को ही जारी रखना है। ये प्रस्ताव बाजार प्रतिभागियों से मिली प्रतिािढयाओं के बाद रखे गए हैं। बाजार प्रतिभागियों ने समाप्ति दिवस पर डेरिवेटिव अनुबंधों के निपटान के लिए सीएएस के तहत तय किए गए क्लोजिंग प्राइस के इस्तेमाल को लेकर प्रतिािढया दी थी। सेबी को मिली प्रतिािढयाओं में डेरिवेटिव सौदों का निपटान सीएएस के जरिए तय किए गए क्लोजिंग प्राइस के आधार पर करने का मुद्दा प्रमुखता से उठाया गया था। सेबी ने तीन अगस्त से इक्विटी नकद बाजार में सीएएस व्यवस्था शुरू की थी। इसका उद्देश्य प्रतिभूतियों का क्लोजिंग प्राइस तय करना है। मौजूदा व्यवस्था के तहत सीएएस से तय क्लोजिंग प्राइस ही समाप्ति दिवस पर डेरिवेटिव अनुबंधों के निपटान मूल्य का आधार बनता है। सेबी ने कहा, समाप्त हो रहे सूचकांक वायदा-विकल्प अनुबंधों में अत्यधिक गतिविधि के साथ-साथ सीएएस के दौरान आईईपी आधारित वायदा-विकल्प कारोबार को देखते हुए, समाप्ति दिवस पर सूचकांक और शेयर वायदा-विकल्प अनुबंधों का निपटान मूल्य तय करने की मौजूदा पद्धति की समीक्षा का प्रस्ताव है। इसके तहत नियामक ने निपटान मूल्य तय करने के लिए दो विकल्प प्रस्तावित किए हैं। पहले विकल्प को ब्लेंडेड वीडब्ल्यूएपी कहा गया है। इसके तहत निपटान मूल्य लगातार कारोबार सत्र (सीटीएस) के अंतिम 30 मिनट और 10 मिनट के सीएएस के दौरान हुए सौदों के आधार पर तय होगा। दोनों अवधियों का योगदान उनके वास्तविक कारोबार मूल्य के आधार पर होगा और किसी भी अवधि के लिए कोई निश्चित भार तय नहीं किया जाएगा। दूसरे विकल्प के तहत सेबी ने मौजूदा सीटीएस वीडब्ल्यूएपी पद्धति जारी रखने का प्रस्ताव रखा है।
यह प्रस्ताव हाल में शुरू किए गए क्लोजिंग ऑक्शन सत्र (सीएएस) की समीक्षा के बाद रखा गया है। सेबी ने परामर्श पत्र में निपटान मूल्य तय करने के लिए दो विकल्प सुझाए हैं। पहला विकल्प लगातार कारोबार वाले सत्र (सीटीएस) के अंतिम 30 मिनट और 10 मिनट के सीएएस में हुए सौदों के आधार पर संयुक्त मात्रा भारित औसत कीमत (वीडब्ल्यूएपी) तय करना है। दूसरा विकल्प मौजूदा सीटीएस वीडब्ल्यूएपी पद्धति को ही जारी रखना है। ये प्रस्ताव बाजार प्रतिभागियों से मिली प्रतिािढयाओं के बाद रखे गए हैं। बाजार प्रतिभागियों ने समाप्ति दिवस पर डेरिवेटिव अनुबंधों के निपटान के लिए सीएएस के तहत तय किए गए क्लोजिंग प्राइस के इस्तेमाल को लेकर प्रतिािढया दी थी। सेबी को मिली प्रतिािढयाओं में डेरिवेटिव सौदों का निपटान सीएएस के जरिए तय किए गए क्लोजिंग प्राइस के आधार पर करने का मुद्दा प्रमुखता से उठाया गया था। सेबी ने तीन अगस्त से इक्विटी नकद बाजार में सीएएस व्यवस्था शुरू की थी। इसका उद्देश्य प्रतिभूतियों का क्लोजिंग प्राइस तय करना है। मौजूदा व्यवस्था के तहत सीएएस से तय क्लोजिंग प्राइस ही समाप्ति दिवस पर डेरिवेटिव अनुबंधों के निपटान मूल्य का आधार बनता है। सेबी ने कहा, समाप्त हो रहे सूचकांक वायदा-विकल्प अनुबंधों में अत्यधिक गतिविधि के साथ-साथ सीएएस के दौरान आईईपी आधारित वायदा-विकल्प कारोबार को देखते हुए, समाप्ति दिवस पर सूचकांक और शेयर वायदा-विकल्प अनुबंधों का निपटान मूल्य तय करने की मौजूदा पद्धति की समीक्षा का प्रस्ताव है। इसके तहत नियामक ने निपटान मूल्य तय करने के लिए दो विकल्प प्रस्तावित किए हैं। पहले विकल्प को ब्लेंडेड वीडब्ल्यूएपी कहा गया है। इसके तहत निपटान मूल्य लगातार कारोबार सत्र (सीटीएस) के अंतिम 30 मिनट और 10 मिनट के सीएएस के दौरान हुए सौदों के आधार पर तय होगा। दोनों अवधियों का योगदान उनके वास्तविक कारोबार मूल्य के आधार पर होगा और किसी भी अवधि के लिए कोई निश्चित भार तय नहीं किया जाएगा। दूसरे विकल्प के तहत सेबी ने मौजूदा सीटीएस वीडब्ल्यूएपी पद्धति जारी रखने का प्रस्ताव रखा है।