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‘अन्याय के खिलाफ सोशल मीडिया पर लिखने से खफा सामंती ताकतों ने ली विनोद साहनी की जान'

प्रकाशित: 13-09-2026 | लेखक: वीर अर्जुन टीम
लखनऊ,(वीअ)। भाकपा (माले) की टीम मृतक विनोद कुमार साहनी के गांव (गोंडा में परसपुर थानाक्षेत्र के रेक्सड़िया-मल्लाहनपुरवा) पावार (11 सितंबर) को पहुंची और हत्याकांड से जुड़े तथ्यों की जानकारी हासिल की। इसके पूर्व, टीम ने परसपुर में साहनी के शव के साथ शाहपुर चौराहे को जाम कर न्याय की मांग कर रहे जनसमूह के साथ भागीदारी कर एकजुटता व्यक्त की।
टीम का नेतृत्व भाकपा (माले) की राज्य स्थायी समिति (स्टैंडिंग कमेटी) के सदस्य राजेश साहनी (गोरखपुर) ने किया। टीम में पार्टी की राज्य समिति सदस्य राम लौट, गोरखपुर जिला कमेटी के सदस्य बजरंग लाल निषाद, शिव भोले निषाद, बस्ती से रमेश चंद्र निषाद, निर्मल सहित अन्य व्यक्ति शामिल थे। भाकपा (माले) के राज्य सचिव सुधाकर यादव ने जांच टीम की रिपोर्ट को शनिवार को प्रेस को जारी करते हुए कहा कि गोंडा के परसपुर क्षेत्र के शाहपुर चौराहे पर बर्तन की दुकान चलाने वाले विनोद कुमार साहनी की हत्या सामंती दबंगई, जातीय वर्चस्व और सत्ता-प्रशासन के संरक्षण के गठजोड़ का गंभीर मामला है। उन्होंने बर्बर हत्या पर गहरा आाढाsश व्यक्त करते हुए कहा कि अन्याय और सामाजिक उत्पीड़न के खिलाफ सोशल मीडिया पर आवाज उठाने और और सामंती वर्चस्व के खिलाफ मुखर रहने वाले विनोद साहनी को निशाना बनाया गया और उनकी हत्या ने योगी सरकार के उस दावे की पोल खोल दी है जिसमें कानून-व्यवस्था और सबको न्याय देने की बात की जाती है।
माले राज्य सचिव ने जांच रिपोर्ट के हवाले से कहा कि विनोद साहनी वर्ष 2023-24 में पूर्व सांसद फूलन देवी के पैतृक गांव गए थे और वहां कुछ समय तक रहकर उनकी प्रतिमा स्थापित कराने तथा उनकी वृद्ध मां के लिए घर बनवाने में सहयोग किया था। जांच रिपोर्ट के अनुसार, फूलन देवी पर हुए अत्याचारों और सामाजिक अन्याय को लेकर विनोद बेहद संवेदनशील थे और इसी पृष्ठभूमि में वे जातीय उत्पीड़न तथा अन्याय के खिलाफ लगातार सोशल मीडिया पर अपनी आवाज उठाते रहे थे। इसी मुखरता से नाराज दबंग ताकतों द्वारा उन्हें निशाना बनाए जाने की आशंका की निष्पक्ष जांच जरूरी है। राज्य सचिव ने कहा कि 9 सितंबर को विनोद साहनी पर जिस तरह हमला हुआ और बाद में उनकी मौत हुई, उसकी सुनियोजित और संगठित हत्या की आशंका को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। उन्होंने मांग की कि हत्या में शामिल सभी लोगों के साथ-साथ उनके राजनीतिक अथवा अन्य संरक्षकों की भूमिका की भी जांच हो और दोषी पाए जाने पर उनके खिलाफ भी एफआईआर दर्ज कर कड़ी कार्रवाई की जाए।